ग़ज़ल
फ़ज़लुर्रहमान, सहायक सचिव (सेवानिवृत्त), ने इस ग़ज़ल में ज़िंदगी, दिल और इंसानी जज़्बातों को सरल और असरदार अंदाज़ में बयां किया है। ग़ज़ल में नेकियों, दिल की बेताबी, और मंज़िल की तलाश जैसे मुद्दों को शायराना अंदाज़ में पेश किया गया है। शेर दर शेर यह ग़ज़ल दिल को छूती है और सोचने पर मजबूर करती है कि कैसे इंसान दौलत और दुनिया की भागदौड़ में अपने दिल की आवाज़… Read More
