तू निखरती है
फ़ज़लुर्रहमान की यह कविता प्यार और ज़िन्दगी की सूक्ष्म भावनाओं का बखान करती है। इसमें इश्क़ का मौसम, तल्ख़ रातों की पीड़ा, और जीवन की संवेदनाएँ बारीकी से उकेरी गई हैं। कवि का अंदाज़ दर्शाता है कि मोहब्बत अचानक उत्पन्न होती है, निखरती है और इसकी खुशबू हमेशा महकती रहती है। Read More
