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ग़ज़ल

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यह ग़ज़ल जीवन की फानी हकीकतों और सामाजिक व्यवहारों पर गहरा तंज है। शायर ने इस फना होने वाली दुनिया से दोस्ती को गलत बताया है और गरीबी में भी इंसानियत के साथ खिलवाड़ को नापसंद किया है। जवानी की मस्ती के बाद की उम्र में हल्की सोच पर सवाल उठाया गया है। शायर कहता है कि अगर इज्जत मिल रही है तो वो किसी की दुआओं की बदौलत है,… Read More

आंचल गिराए नहीं जाते

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यह शायरी रिश्तों की पाकीज़गी, जज़्बात की गहराई और ज़िंदगी के तल्ख़ तजुर्बों पर रोशनी डालती है। इसमें बताया गया है कि सच्चे रिश्ते बनते नहीं, खुद बन जाते हैं और जज़्बात खरीदे नहीं जाते। शायर बताता है कि रूह को संवारिए, क्योंकि जिस्म तो फानी है। शायरी भावनाओं का एक ख़ूबसूरत आईना है।

बिन ब्याहे अर्पण का

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फ़ज़लुर्रहमान की यह कविता यौवन, प्रेम, तर्पण और जीवन के दर्शन को छूते हुए मनोवैज्ञानिक यात्रा प्रस्तुत करती है। इसमें अर्पण (समर्पण) और बिना विवाह के प्रेम संबंधों की उलझन, सावन में प्रेम की कथा, पूर्वजों के तर्पण का महत्व, लक्ष्मण रेखा का मिटना और महाकाव्य में दोष मिटाने की कठिनाई जैसी जीवन के विभिन्न बिंदुओं को शायरी के अंदाज़ में छूआ गया है।

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ज़िन्दगी क्या है?

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यह लेख ज़िन्दगी की हकीकत और उसके मक़सद पर रोशनी डालता है। इसमें बताया गया है: ज़िन्दगी एक जलता चिराग़ और खुदा की अमानत है जो एक दिन बुझ जाएगी। यह जद्दोजहद और कांटों से भरी राह है, जिसमें मोहब्बत फूल की खुशबू की तरह है। ज़िन्दगी एक तोहफा और नेमत है, जिसका शुक्र अदा करना चाहिए। हर कदम पर फूल बिखेर कर इंसान अपनी ज़िन्दगी को बाग बना सकता…

ग़ज़ल

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फ़ज़लुर्रहमान, सहायक सचिव (सेवानिवृत्त), ने इस ग़ज़ल में ज़िंदगी, दिल और इंसानी जज़्बातों को सरल और असरदार अंदाज़ में बयां किया है। ग़ज़ल में नेकियों, दिल की बेताबी, और मंज़िल की तलाश जैसे मुद्दों को शायराना अंदाज़ में पेश किया गया है। शेर दर शेर यह ग़ज़ल दिल को छूती है और सोचने पर मजबूर करती है कि कैसे इंसान दौलत और दुनिया की भागदौड़ में अपने दिल की आवाज़…

“सुनहरे मोती”

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“सुनहरे मोती” ज़िन्दगी का असल मज़ा इसी में है कि हमेशा तकलीफों और मुसिबतों का मुकाबला करो और उसके साथ-साथ... Read more

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मसीहा बनते हो

मसीहा बनते हो तुम्हारा प्यार बारिश  की तरह बरसाओ बहुत उमस है जहां हो यहां चले आ ओ कितना आसां... Read more

बियाबान चाहिए

आप  की  दुआओं  का  एहसान  चाहिए ज़िन्दा  हूं और ज़िन्दा  ही इन्सान चाहिए यूं  मुफलिसी में जीना  जीना तो  नहीं... Read more

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मीर आज़म अली जैदी को मिला अमेरिका की यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट सम्मान

24 मई को दुबई में आयोजित कार्यक्रम में अमेरिका की सीडर ब्रुक यूनिवर्सिटी ने प्रसिद्ध इतिहासकार, पत्रकार और शायर मीर आज़म अली जैदी को "लीडर्स 2025" के अंतर्गत डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। उर्दू भाषा, इतिहास और पत्रकारिता में उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।

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