गजल
यह ग़ज़ल जीवन की फानी हकीकतों और सामाजिक व्यवहारों पर गहरा तंज है। शायर ने इस फना होने वाली दुनिया से दोस्ती को गलत बताया है और गरीबी में भी इंसानियत के साथ खिलवाड़ को नापसंद किया है। जवानी की मस्ती के बाद की उम्र में हल्की सोच पर सवाल उठाया गया है। शायर कहता है कि अगर इज्जत मिल रही है तो वो किसी की दुआओं की बदौलत है,… Read More
