जीर्ण रोग एवं साक्ष्य आधार पर सफल उपचार पर कार्यशाला
जयपुर(रॉयल पत्रिका)। जीर्ण रोग एवं साक्ष्य आधार पर उसके उपचार योग्य उपचार पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशाला दिनांक 22 दिसंबर को होटल द फर्न रेजीडेंसी, जयपुर में अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन राजस्थान द्वारा डाबर इंडिया लिमिटेड के सहयोग से आयोजित की गई। डॉ. शौकत अली अंसारी निदेशक यूनानी चिकित्सा विभाग राजस्थान सरकार मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. फरहत अली चौधरी ने की। कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में सुपर स्पेशलिस्ट एवं वरिष्ठ वैज्ञानिकों तथा स्कॉलर वेरे ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए तथा अपनी विशेषज्ञता एवं कौशल जैसे व्याख्यान भी दिए। डॉ. फरहत अली चौधरी अध्यक्ष आरओबीए एवं अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन केन्द्रीय समिति नई दिल्ली के कार्यकारी सदस्य ने ब्रिटिश काल में आयुष की ऐतिहासिक स्थापना पर व्याख्यान दिया। स्वतंत्रता सेनानी हकीम अजमल खान ने आयुष चिकित्सकों के विकास एवं भाईचारे तथा उनके समुचित प्रशिक्षण एवं संवर्धन के लिए अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन का गठन किया था। कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. मकबूल अहमद ने अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन राजस्थान एवं राजस्थान में इसकी गतिविधियों के बारे में व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन राजस्थान में निरंतर कार्य कर रहा है तथा चिकित्सा जगत में नवीनतम शोध में ज्ञान के उन्नयन एवं जनहित में यूनानी चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार तथा उन्हें पूरे राजस्थान में घर-घर जाकर निशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए फार्मास्युटिकल कंपनियों के सहयोग से मासिक 2-3 सीएमई का आयोजन कर रहा है।
मुख्य अतिथि डॉ. शौकत अली ने कहा कि भारत सरकार और राजस्थान सरकार आयुष पद्धति को बढ़ावा देने के लिए निरंतर काम कर रही है। हाल ही में राजस्थान सरकार ने राइजिंग राजस्थान कार्यक्रम में दुनिया भर से आयुष एमओयू के लिए आमंत्रित किया था, जिसके तहत आयुष एमओयू में भाग लेने के लिए कई प्रतिनिधि जयपुर आए। विभाग राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतरीन सुविधाएं दे रहा है। पिछले वर्ष 20 आयुष आरोग्य मंदिर और एससी, एसटी व टीएसपी क्षेत्रों में 18 निशुल्क यूनानी शिविर लगाए गए, जिनमें निशुल्क दवाइयां वितरित की गई। प्रति शिविर लगभग 50 हजार रुपए की लागत आई। हाल ही में स्थापित यूनानी इकाइयों का फर्नीचर भी जल्द ही उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि वे अपने जीवन में सफलता के लिए यूनानी पद्धति के मूल सिद्धांतों पर अमल करें और अपने अभ्यास में बेहतरीन परिणाम प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि पारंपरिक औषधियां प्रकृति से परिचित और हानिरहित होने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बीमारियों को ठीक भी करती हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. आफताब नकवी ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। मुख्य अतिथि डॉ शौकत अली को उनकी पदोन्नति पर डाबर इंडिया की टीम और अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन राजस्थान की कार्यसमिति द्वारा गर्मजोशी से सम्मानित किया गया। कार्यशाला में सरकारी और निजी चिकित्सकों से लगभग 100 यूनानी चिकित्सकों ने भाग लिया और सभी को आयोजकों द्वारा एक मोमेंटो और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है। डाबर इंडिया के महाप्रबंधक ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया और उन्हें कुछ यादगार उपहार भी दिए। अंत में कार्यवाहक अध्यक्ष और मुख्य आयोजक डॉ मकबूल अहमद ने मुख्य अतिथि डॉ शौकत अली को अपना कीमती समय और डाबर इंडिया को ऐसे आयोजन के लिए धन्यवाद दिया और अखिल भारतीय यूनानी तिब्बी सम्मेलन राजस्थान की पूरी टीम और कार्यसमिति विशेष रूप से वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ फिरोज, उपाध्यक्ष प्रो. सिराजुल हक, कोषाध्यक्ष डॉ शाहिद अली, डॉ दयार नूरानी, डॉ अबरार, डॉ. मकबूल अहमद ने कार्यशाला की सफलता में सहयोग किया।
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