गुलाबी नगरी में रमज़ान की रौनक, बाज़ारों और जायकों की बहार
- – रामगंज और घाटगेट बाज़ार बने विभिन्न खाने के शौकीनों की जन्नत
- – रमजानों में जयपुर के व्यापारियों की बढ़ी कमाई
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। राजधानी जयपुर इन दिनों रमज़ान के मुक़द्दस महीने की रौनक से सराबोर है। इस पाक महीने में शहर के पुराने इलाके—रामगंज, घाटगेट, बाबू का टीबा और चांदपोल—खाने की महक, मस्जिदों की रौनक और बाज़ारों की चहल-पहल से गुलज़ार हो उठे हैं। सुबह की सहरी से लेकर शाम की इफ्तारी तक, जयपुर की तंग गलियाँ और चौड़े बाज़ार एक अलग ही आलम में डूबे नज़र आते हैं। यहाँ का भाईचारा, ज़ायकेदार खाना और त्यौहार का माहौल न सिर्फ़ स्थानीय लोगों को बल्कि दूर-दूर से आने वाले सैलानियों को भी अपनी ओर खींच रहा है।


- पूरे शहर को लुभा रहा पुराने शहर के खाने का जादू :
रमज़ान का महीना आते ही परकोटे के रामगंज बाज़ार और घाटगेट बाजार खाने के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं लगते। यहाँ की हवा में बिरयानी, निहारी, हलीम, कबाब और शीरमाल की खुशबू फैल जाती है। गलियों में लगे स्टॉल्स और मशहूर हॉटलों पर इफ्तार के वक़्त लोगों की लंबी क़तारें देखने को मिलती हैं। होटल एम.एम. खान, जो 40 साल से जयपुर की शान बना हुआ है, जयपुर वालों का सबसे पुराना और मशहूर ठिकाना है। यहाँ का चिकन चंगेज़ी और मटन निहारी और हलीम लोगों की ज़ुबान पर चढ़ा हुआ है। वहीं अली चिकन सेंटर का चिकन टिक्का और बोटी कबाब भी रोज़ेदारों को खूब लुभाते हैं। इसके अलावा होटल गरीब नवाज़, मदीना होटल, काबुल चिकन सज्जी, होटल मोहम्मदी, मौलाना हलवाई के खाने विभिन्न जायकों की खुशबु बिखेर रहे हैं। स्थानीय निवासी मोहम्मद अतीक बताते है कि रमज़ान में यहाँ का माहौल ही बदल जाता है। लोग अपने घरवालों, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इफ्तार और सहरी का मज़ा लेने आते हैं यहाँ रातभर गलियाँ गुलज़ार रहती हैं। आबिद अब्बासी के मुताबिक इफ्तार की थाली में खजूर का होना लाज़िमी है। इसके साथ शरबत, फल और गरमा-गरम पकवान इफ्तारी को और लज़ीज़ बनाते हैं। रमज़ान में जयपुर की गलियों में ईरानी शीरमाल रोटी की महक भी फैल जाती है। दूध, मेवे और केसर से बनी ये रोटी इतनी लज़ीज़ होती है कि इसे बिना सालन के भी खाया जा सकता है। रामगंज और घाटगेट की दुकानों पर शीरमाल की भारी डिमांड रहती है। इसके अलावा, मिठाइयों में मैंगो रबड़ी और गुलाब जामुन भी लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। मौलाना हलवाई जैसी 90 साल पुरानी दुकानें इस मौके पर ख़ास मिठाइयाँ तैयार करती हैं।
- बाबू का टीबा बना बिरयानी का गढ़
जयपुर में रमज़ान की सबसे ज़्यादा रौनक बाबू का टीबा में देखने को मिल रही है। ये इलाका अपनी बिरयानी और हलीम के लिए मशहूर है। इस एरिया में एक दर्जन से अधिक बिरयानी की दुकाने है। बाबू का टीबा अब बिरयानी के टीबे के नाम से मशहूर हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक बाबू के टीबे में एक दिन में 100 से ज्या


दा बिरयानी के देग बेचे जाते हैं। बिरयानी खाने के लिए नौजवानों की भीड़ लगी रहती है। जो शहर के अलग-अलग क्षेत्रो से यहां बिरयानी खाने आते हैं। यहाँ की तंग गलियों में रातभर दुकानें खुली रहती हैं और लोग सहरी से लेकर इफ्तार तक यहाँ का स्वाद चखने आते हैं। अमजद की बिरयानी और अलीजा बिरयानी यहाँ की पहचान बन चुकी हैं। एक देग में सैकड़ों लोगों के लिए बिरयानी तैयार होती है और रात 2 बजे तक ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। स्थानीय व्यापारी एवं लब्बैक फेशन के आकिब खान कहते हैं बाबू का टीबा का हलीम और बिरयानी का स्वाद पूरे जयपुर में मशहूर है। रमज़ान में यहाँ का नज़ारा देखने लायक होता है।
- सहरी और इफ्तार का ख़ास इंतज़ाम
सहरी का वक़्त सुबह तड़के 3-4 बजे तक होता है, जब लोग नमाज़ के बाद हल्का और पौष्टिक नाश्ता करते हैं। बाबू का टीबा और रामगंज में चाय, पराठे और बिरयानी की दुकानें इस दौरान खुली रहती हैं। वहीं, शाम को इफ्तार का वक़्त आते ही बाज़ारों में रौनक छा जाती है। खजूर, पानी और शरबत के साथ रोज़ा खोलने के बाद लोग गरमा-गरम पकवानों का मज़ा लेते हैं। यहाँ के लोग कहते हैं कि इफ्तार सिर्फ़ भूख मिटाने का ज़रिया नहीं, बल्कि अपनों के साथ वक़्त बिताने का एक ख़ूबसूरत मौक़ा है। रमजान में सूखे मेवों की माँग भी इस दौरान आसमान छू रही है। बादाम, पिस्ता, काजू और खजूर की दुकानों पर भीड़ लगी रहती है। खजूर की कीमत 80 रुपये से लेकर 1500 रुपये प्रति किलो तक है, और सऊदी अरब, ईरान और यूएई से आए खजूर ख़ास तौर पर पसंद किए जा रहे हैं।

- बाज़ारों में शॉपिंग का जोश और ईद की तैयारी
रमज़ान का महीना सिर्फ़ रोज़े और इबादत का ही नहीं, बल्कि ईद की तैयारियों का भी होता है। जयपुर के बाज़ारों में शॉपिंग की धूम मची है। बापू बाज़ार, जौहरी बाज़ार, रामगंज, और चांदपोल में चूड़ियाँ, जूतियाँ, कपड़े और गहनों की खरीदारी ज़ोरों पर है। महिलाएँ ईद के लिए जरी वाले कपड़े, लाख की चूड़ियाँ और रंग-बिरंगे परिधान खरीद रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि इस महीने में उनकी बिक्री 30-40% तक बढ़ जाती है। रामगंज की सड़कों पर लगे स्टॉल्स पर ईद स्पेशल कपड़े और जूतियाँ लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। रमज़ान के महीने में जयपुर के होटल, ढाबे और स्ट्रीट वेंडर्स का कारोबार 50% तक बढ़ जाता है। छोटे दुकानदार रोज़ाना 10-15 हज़ार रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। पुराने शहर के बाज़ारों में हर दिन 10-15 लाख रुपये का टर्नओवर हो रहा है।
- गुलाबी नगरी की अनोखी पहचान
जयपुर की ये रमज़ान की रौनक न सिर्फ़ रोज़ेदारों के लिए, बल्कि पर्यटकों और खाने के शौकीनों के लिए भी ख़ास है। यहाँ का लज़ीज़ खाना, रंग-बिरंगे बाज़ार और आपसी मोहब्बत गुलाबी नगरी को दुनिया भर में मशहूर कर रहे हैं। चाहे आप यहाँ के बिरयानी के दीवाने हों या शीरमाल के शौकीन, जयपुर का रमज़ान हर किसी के लिए कुछ न कुछ ख़ास लेकर आता है। रमजान जयपुर में सिर्फ इबादत का महीना नहीं होता, बल्कि यह एक ऐसा समय होता है जब पूरा शहर एक अलग ही रौनक में डूब जाता है। मस्जिदों की रूहानी फिजा, बाजारों की हलचल, और जायकों का मजा – यह सब मिलकर रमजान को एक यादगार अनुभव बना देते हैं।
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