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मुस्लिम पार्षद की संख्या 30 से घटकर 5 पर आ सकती है

जयपुर

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जयपुर में होगा एक नगर निगम

संयुक्त नगर निगम में होंगे 150 वार्ड

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एम खान

जयपुर (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान की भाजपा सरकार ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हेरिटेज को मिलाकर संयुक्त रूप से पहले की तरह एक ही नगर निगम बना दिया है। कांग्रेस सरकार ने जयपुर नगर निगम को दो भागों में बाटकर दो नगर निगम बना दिए थे। कांग्रेस पार्टी को उसका फायदा भी मिला था। कांग्रेस ने जयपुर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बना लिया था। जयपुर नगर निगम हेरिटेज में मुस्लिम एवं दलित आबादी होने के कारण कांग्रेस बीजेपी से ज्यादा पार्षद जीताने में कामयाब रही थी। जयपुर शहर को भाजपा का गढ़ माना जाता है। लेकिन धीरे-धीरे भाजपा की पकड़ जयपुर शहर में ढीली होने लगी है। जयपुर के दोनों नगर निगमो को मिलाने का उद्देश्य भी भाजपा सरकार का यही प्रतीत होता है कि लोकल सरकार भी बीजेपी जन प्रतिनिधियों के हाथ में रहे। वैसे चुनाव, चुनाव ही होता है। भाजपा को नगर निगम चुनाव में फायदा भी मिल सकता है और नुकसान भी हो सकता है। क्योंकि भाजपा का वोट बैंक ब्राह्मण, वैश्य एवं राजपूत समाज माना जाता है, जो जयपुर में बड़ी संख्या में है। दूसरी तरफ दूसरी जातियों की संख्या भी जयपुर में तेजी से बढ़ रही है। जयपुर के बाहरी क्षेत्रों में जाट, माली, दलित, मीणा भी बड़ी तादात में ग्रामीण क्षेत्रों में आकर बसे हैं। इसके अलावा दलित, मीणा और ओबीसी वर्ग की जातियों में जबरदस्त राजनीतिक जागरूकता है। ओबीसी, दलित और आदिवासी जातियों का मुकाबला श्रवण जातियों से हो सकता है। ऐसी स्थिति में दावा नहीं किया जा सकता है कि इस बार भाजपा को नगर निगम में बढ़त मिल ही जाएगी।

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मुस्लिम आबादी को बड़े वार्ड बनाकर सीमित करने की कोशिश-

देश में लोकतंत्र के पुनर्गठन एवं नियम, उपनियम का फायदा उठाकर राजनीतिक फायदा उठाने की पुरानी परंपरा रही है। इसी तरह जयपुर नगर निगम पुनर्गठन में दिखाई दे रहा है। साफ तौर पर देखा जा रहा है कि दो-चार मुस्लिम बाहुल्य वार्डों को मिलाकर एक बड़ा वार्ड बनाने की कोशिश की गई है। संयुक्त नगर निगम में मुस्लिम बाहुल्य वार्डों में मतदाताओं की संख्या भी 30 हजार से ज्यादा कर दी गई है। यह इसलिए किया गया है कि मुस्लिम आबादी कुछ ही वार्डों तक सीमित रह जाए और कम से कम संख्या में मुस्लिम पार्षद जीत कर आए। निकायों के पुनर्गठन और विभाजन के सरकार के पास अधिकार होते हैं। सरकार के निर्णय को चैलेंज नहीं किया जा सकता है, लेकिन सरकार की मंशा क्या है समझा जा सकता है। ऐसा ही जयपुर नगर निगम में दिखाई दे रहा है। यहां मुस्लिम पार्षद कैसे कम से कम जीतकर आए, कोशिश की गई है।

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