भारत अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने अपने घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए एक संरक्षणवादी (protectionist) व्यापार नीति अपनाई है। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद, भारत ने धीरे-धीरे टैरिफ दरों को कम किया और अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोला। खासकर अमेरिका और भारत के बीच व्यापार संबंधों में टैरिफ एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। हाल के समय में टैरिफ और भारत के बीच का संबंध एक जटिल और विकसित होता हुआ मुद्दा है। टैरिफ एक प्रकार का कर है जो किसी देश द्वारा दूसरे देश से आयातित वस्तुओं पर लगाया जाता है। टैरिफ लगाने का मुख्य उद्देश्य घरेलू उद्योगों की रक्षा करना, आयात को हतोत्साहित करना और सरकार के लिए राजस्व जुटाना है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत रूसी तेल खरीद रहा है और रूसी वार मशीन को बढ़ावा दे रहा है। यह बात भारत के आन्तरिक मामलों में दखल अन्दाजी कही जा सकती है और भारतीय विदेश नीति के विपरीत है। अमेरिका ने भारत पर 50% तक का भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की है जो अनुचित है। इस टैरिफ के दो हिस्से हैं: 25% रेसिप्रोकल टैरिफ: यह टैरिफ इस तर्क पर आधारित है कि भारत भी अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च टैरिफ लगाता है। जो 7 अगस्त 2025 से लागू हुई । 25% अतिरिक्त टैरिफ: यह टैरिफ विशेष रूप से रूस से कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता के कारण लगाया गया है। जो 27 अगस्त 2025 से लागू होगा। टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू खपत पर निर्भर करती है। फिर भी कुछ सेक्टरों पर प्रभाव पड़ेगा जैसे टैक्सटाइल, रत्न, चमड़े के सामान,रसायन और मशीनरी साथ ही घरेलू उद्योगों पर भी प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है क्योंकि भारतीय वस्तुओं की अमेरिका में क़ीमत बढ़ने से मांग में कमी आएगी और भारतीय उद्योगपतियों का मुनाफा भी कम होना संभावित है। ऐसी स्थिति में भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा , क्योंकि संप्रभु देशों को अपने व्यापारिक साझेदार, व्यापार और आर्थिक सहयोग में साझेदार चुनने और किसी विशेष देश के हित में व्यापार और आर्थिक सहयोग व्यवस्था चुनने का अधिकार होना चाहिए। स्पष्ट है कि रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका द्वारा भारत को निशाना बनाना अनुचित और अविवेकपूर्ण है। टैरिफ के मुद्दे पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है, जो सर्वथा उचित है भारत अपने देश के किसानों और छोटे निर्माताओं के हितों की रक्षा करना सुनिश्चित कर रहा है। इसके लिए सभी आवश्यक संभावनाओं को देशहित में देखते हुए बिना अमेरिकी दबाव में आए आवश्यक क़दम उठा रहा है और “नेशनल इंटरेस्ट” को प्राथमिकता दे रहा है। टैरिफ के प्रभाव को कम करने की दिशा में यूरोप, चीन या मध्य पूर्व (यूएई, सऊदी अरब) और आसियान देशों के व अन्य विदेशी बाज़ारों के साथ व्यापार विस्तार किया जाना, संभावित समाधान और वार्ता की दिशा (जैसे आपसी समझौते, द्विपक्षीय वार्ता आदि) में बढ़ना, जैसे कदम भारत के हित में होंगे।
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