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मुस्लिम समाज के लोग चाहते है कि उनके लिए दूसरे आवाज उठाएं  – एडवोकेट मुजाहिद नकवी

Jaipur

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जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। एडवोकेट मुजाहिद नकवी का कहना हैं कि यह मुस्लिम समाज की हकीकत है जिसके कारण मुस्लिम समाज विकास की बजाय पिछड़ता जा रहा हैं। मैंने अपनी ज़िंदगी का लगभग हिस्सा मुस्लिम बहुल इलाक़े में ही गुज़ारा हैं। इन तमाम मुस्लिम बहुल इलाकों में मुसलमानों को खुब मनमानी करते देखा, करप्शन करते देखा, मस्जिद मदरसों की कमेटी के लिए गुटबंदी करते देखा, गुटबंदी ऐसी कि लाठी तलवार चलते देखा, आपस में खूब मुकदमें करते देखा, फ्लैटों और प्लॉटों पर कब्ज़ा करते देखा, रास्ते और सरकारी ज़मीनों पर कब्ज़ा करते देखा, दुकानदारों से रंगदारी मांगते देखा, गंदगी और कुड़े का अंबार देखा, एक मस्जिद में दो गुटों का दो बार जुमे का नमाज़ देखा, चंदे का कारोबार देखा, लोगों को सुद का कारोबार करते देखा, नशे में डुबे बच्चों और युवाओं का भविष्य देखा लेकिन काउंसलर चुप, विधायक चुप, इमाम चुप, एनजीओ चुप, अख़बार वाले चुप, अख़बार और चैनल में काम करने वाले चुप, जमाती चुप, तब्लीग़ी चुप, अपनी कियादत वाले चुप, उसकी कियादत वाले चुप, मज़ार वाले चुप, हदीस वाले चुप, क़ुरान वाले चुप, फातिहा वाले चुप, चिल्ला वाले चुप, पैसे वाले चुप, डॉ. चुप, प्रोफेसर चुप, बिल्डर चुप, डीलर चुप, एक्टीविस्ट चुप, नमाज़ी चुप, हाजी चुप, सबके सब चुप। कारण सिर्फ़ मामलात न बिगड़ जाए, रिश्ते न बिगड़ जाएं, कारोबार पर असर न पड़ जाए, विधायक न नाराज़ हो जाए, काउंसलर न ग़ुस्सा हो जाए, गुंडा बदमाश न‌ पीछे पड़ जाए, दोस्ती न टुट जाए, रिश्तेदारी न बिगड़ जाए, डील न टुट जाए, कॉन्ट्रैक्ट न ख़त्म हो जाए, मंथली न रूक जाए, नौकरी न छुट जाए। बगैरह बगैरह। यानी सिर्फ़ अपने ज़ाती फायदे के लिए सब के सब चुप हैं। लेकिन यही मुस्लिम समाज चाहता है कि केजरीवाल बोले, राहुल बोले, ममता बोले, अखिलेश बोले, लालू बोले, नीतीश बोले। भाई जिस तरह आप अपने चंद फ़ायदे के लिए अपने समाज में हो रहे ज़ुल्म पर चुप रहते हैं, तमाशाबीन रहते हैं वैसे ही यह भी अपने फायदे के लिए चुप रहते हैं। आपको क्या लगता है कि आपके पांच सीट के लिए कोई 65 सीटों की कुर्बानी दे देगा? जिस तरह आप चुप हैं वैसे ही यह भी चुप रहेंगे। याद रखें। बैलेंस करना सिर्फ़ आप ही नहीं जानते, नेता भी जानते हैं। दुनियादारी सिर्फ़ आप नहीं जानते, नेता भी जानते हैं। आप दुनियादारी छोड़ दें, आप बोलना शुरू करें फिर देखें मुर्दा भी बोल‌ उठेगा और बदलाव की लहर शुरू हो जाएगी !

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