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सुकेत का वर्षों पुराना हाट बाजार ना ग्राम पंचायत बदल पाई, ना नगरपालिका बदल पाई बदहाली का शिकार

सुकेत

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सुकेत, (रॉयल पत्रिका)।  कस्बे का हाट बाजार कई  सालों से लग रहा है। यहां बरसों  से व्यापारी दुकानें लगाते आ रहे हैं। पहले ग्राम पंचायत और अब नगर पालिका हर साल इस बाजार से करीब 6 लाख रुपए टैक्स वसूलती है। इसके बावजूद यहां न तो बैठने के लिए प्लेटफॉर्म हैं और ना ही पीने के पानी की व्यवस्था। साफ-सफाई और शौचालय की सुविधा भी नहीं है। यही कारण है कि यह बाजार अब धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। बारिश के मौसम में व्यापारियों को कीचड़ में खड़े रहकर दुकानें लगानी पड़ती हैं। खरीददारी करने आने वाले लोगों को भी कीचड़ भरे रास्ते व गंदगी के बीच खरीददारी – करनी पड़ती है।

 

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कस्बे के थोक किराना व्यापारी महावीर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपने पिता के साथ यहां व्यापार शुरू किया था। आज उनकी बड़ी दुकान है। पर हाट बाजार की हालत पहले जैसी ही है। पहले ग्राम पंचायत थी, अब नगर पालिका है, पर सुविधाएं नहीं बढ़ीं। बाहर से आने बाले व्यापारी भी अब कम हो गए हैं। इससे कस्बे का व्यापार प्रभावित हो रहा है।

 

भाजपा मंडल अध्यक्ष व किराना व्यापारी रहे नरेंद्र व्यास ने बताया कि पहले ग्राम पंचायत 5 रुपए हाट टैक्स लेती थी। अब नगर पालिका ज्यादा टैक्स वसूल रही है, लेकिन सुविधाएं नहीं दे रही। टैक्स वसूलने वाले कर्मचारी मनमाने ढंग से पैसे लेते हैं। अतिक्रमण भी बड़ी समस्या बन गया है। बाजार में कई गुमटियां अवैध रूप से लगी हैं। इससे आने-जाने का रास्ता संकरा हो गया है। चारदीवारी भी एक जगह से तोड़ दी गई है। चारो तरफ अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है जो हाट बाजार के अस्तित्व को खत्म कर रहा है। नगरपालिका की और से अब तक सिर्फ एक प्लेटफॉर्म बनवाया है, जो अनुपयोगी साबित हो रहा है। ग्राम पंचायत कार्यकाल में भी कई योजनाएं बनीं, पर कोई सफल नहीं हुई।

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नगर पालिका प्रशासन की और से लाखों रुपए की टैक्स वसूली के बावजूद कोई स्थाई बाजार में विकसित नहीं की है। लाइट, पानी, शौचालय, व बैठने को साफ स्वच्छ प्लेटफॉर्म ये इस हाट बाजार की प्राथमिक जरूरत है जो नगरपालिका प्रशासन व्यापारियों को नहीं दे पा रहा है। लोगों का कहना है कि  प्रशासन को विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि एवं व्यापारियों और नागरिकों  को सुविधा मिल सके।

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