Loading...

राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

Jaipur

Follow us

Share

  • मॉब लिंचिंग और वक्फ संशोधन के खिलाफ जताया विरोध

भरतपुर। राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा की भरतपुर ज़ोन शाखा की ओर से 14 जून को राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन एडीएम राधेश्याम शर्मा के माध्यम से भेजा गया और इसी प्रकार के ज्ञापन देश के सभी जिलों में एक साथ सौंपे गए। ज्ञापन में मुसलमानों के खिलाफ हो रही मॉब लिंचिंग, धार्मिक स्थलों पर हमलों, बस्तियों को उजाड़ने, वक्फ कानून में हुए हालिया संशोधनों और संविधान विरोधी गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। इस अवसर पर राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा के असलम खान, राष्ट्रीय किश्चियन मोर्चा के भगवान सहाय, रविन्द्र कुमार, जमाअते इस्लामी हिन्द के मास्टर कलुआ खान, शाहिद खान और भारत मुक्ति मोर्चा के हंसलाल सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे। ज्ञापन में कहा गया है कि बीते एक दशक में केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अन्याय, उत्पीड़न और हिंसा के मामले बढ़े हैं। खासकर फर्जी गौकशी, लव जेहाद और धार्मिक पहचान के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाकर हत्याएं की जा रही हैं। ट्रेनों, पुलिस कस्टडी और सार्वजनिक स्थानों पर मॉब लिंचिंग की घटनाएं चिंता का विषय बन चुकी हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वर्शिप एक्ट 1991 के बावजूद मस्जिदों और वक्फ की संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर बुलडोजर चलाकर मुसलमानों की दुकानों, मकानों और बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है। ज्ञापन में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन बताया गया है। कहा गया है कि यह विधेयक मुसलमानों की संपत्तियों को माफियाओं और सरकारों के बीच स्थानांतरित करने की साजिश का हिस्सा है। इस विधेयक को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है। ज्ञापन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), भाजपा, बजरंग दल, अभिनव भारत जैसे संगठनों पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि इनकी विचारधारा ने नफरत को बढ़ावा दिया है और अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है।

Advertisement

ज्ञापन में प्रमुख मांगे इस प्रकार हैं:

Advertisement
  1. मॉब लिंचिंग के दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से फांसी या आजीवन कारावास की सजा दी जाए।
  2. मारे गए निर्दोषों के परिजनों को 1 करोड़ रुपए मुआवजा, सरकारी नौकरी और सुरक्षा दी जाए।
  3. नफरत फैलाने वाले संगठनों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
  4. जिन परिवारों को अवैध तरीके से बेघर किया गया है, उन्हें पुनर्वास और हर्जाना प्रदान किया जाए।
  5. विस्थापितों को 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।
  6. इस्लामिक धार्मिक स्थलों और ग्रंथों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाया जाए।
  7. “कम्युनल वायलेंस प्रिवेंशन एक्ट” को लागू किया जाए।
  8. वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
  9. मदरसा बोर्ड की बैठक बुलाकर योग्य मदरसों को मान्यता प्रदान की जाए।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि इन मांगों पर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई, तो राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन सौंपने वाले संगठनों में भारत मुक्ति मोर्चा, जमाअत ए इस्लामी हिन्द, राष्ट्रीय किश्चियन मोर्चा, शाहिद खान, भगवान सहाय, विश्वेन्द्र सिंह, रविन्द्र कुमार आदि शामिल रहे

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।