मेट्रो स्टेशन अब रामगंज चौपड़ पर नहीं बनेगा ?
- जबकि रामगंज चौपड़ से सबसे ज्यादा यात्री भार मिलने वाला था
- यहां के व्यवसायी, बाहर मजदूरी करने जाने वाले, बाहर पढ़ने जाने वाले छात्र-छात्राओ और नौकरी पेशा लोगों को मेट्रो का फायदा नहीं मिल पाएंगा
- आश्चर्यजनकरूप से इस क्षेत्र से जीते विधायको, पार्षदों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समाज सेवियों ने प्रदेश सरकार से अभी तक रामगंज चौपड़ पर मेट्रो स्टेशन बनाने की माग नहीं की है।
जयपुर,(रॉयल पत्रिका)। कांग्रेस की प्रदेश सरकार ने मेट्रो 2 फेज का विस्तार बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक करने का निर्णय लिया था। कांग्रेस सरकार के अंतिम कार्याकाल में भूमिगत लाइन डालने का कार्य भी शुरू हो गया था। मेट्रो के 2 फेज में रामगंज चौपड़, गलता गेट और ट्रांसपोर्ट नगर पर मेट्रो स्टेशन बना था। रामगंज चौपड़ के आस पास का घनी आबादी वाला क्षेत्र है। यहां से व्यापारी मजदूर एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में रोजाना अन्यत्र आते जाते है। रामगंज क्षेत्र के लोगों को मेट्रो द्वितीय फेज से सबसे ज्यादा फायदा मिलने वाला था। दूसरा यहां के लोग सोच रहे थे कि मेट्रो स्टेशन बनने से क्षेत्र में व्यापार बढ़ेगा, लोगों को रोजगार मिलेगा और यहां की प्रॉपर्टी की कीमत भी तेजी से बढ़ेगी। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार ने पिछली सरकार का निर्णय बदल दिया। मेट्रो फेज द्वितीय का काम तो पूरा होगा लेकिन रामगंज चौपड़ पर मेट्रो स्टेशन नहीं बनेगा। जब यह सूचनाएं लोगों तक पहुंची तो क्षेत्र की जनता ने और व्यापारियों ने सरकार के निर्णय से सहमति जताई। क्षेत्र की जनता, व्यापारी, मजदूर और छात्र छात्राएं अब मेट्रो रेल का फायदा नहीं उठा पाएंगे सिर्फ मेट्रो रेल आते जाते देखकर ही खुश हो सकेंगे।
राजनीतिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियो एवं जनता की प्रतिक्रिया –

रामगंज, घोड़ा निकास रोड, और घाट गेट बाजार के व्यापारियों ने सरकार के निर्णय पर अप्रसन्नता जाहिर की है। जनता में नाराजगी है। लेकिन क्षेत्र के राजनीतिक कार्यकर्ता, पार्षद, और यहां से कांग्रेस के दोनों विधायक चुप्पी साधे हुए हैं। शायद इसका कारण हो सकता है कि अभी चुनाव नहीं हो रहे है। नेताओं को जनता के रोजगार, व्यापार एवं अन्य सुविधा से कोई लेना देना नहीं है, उनको सिर्फ वोट चाहिए। सरकार का रामगंज चौपड पर मेट्रो स्टेशन नही, बनाने का निर्णय का कोई उचित आधार दिखाई नहीं दे रहा है। सिर्फ एक ही वजह हो सकती है कि इस क्षेत्र पर मुस्लिम बाहुल क्षेत्र का तमगां लगा हुआ है। वैसे यहां मुस्लिम और हिंदू का 70:30 का अनुपात है। देश के सभी नागरिकों का अधिकार होता है कि सरकार के विकास कार्यक्रम में उन्हें भागीदारी मिले। लेकिन सरकार केवल यहां इसलिए मेट्रो स्टेशन नहीं बना रही है कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है, उचित नहीं कहा जा सकता है।

यात्रीभार
माना जा रहा है कि यदि रामगंज चौपड़ स्टेशन बनता तो यहां सभी अन्य मेट्रो स्टेशन से यात्रीभार ज्यादा मिलता। क्योंकि यहां के मजदूर अजमेर रोड, मानसरोवर, सीतापुरा, वीकेआई, सिंधी कैंप चांदपोल मालवीय नगर आते जाते हैं। यहां के छात्र-छात्राएं टोंक रोड, जगतपुरा मानसरोवर, अजमेर रोड, दिल्ली रोड, सीकर रोड की शिक्षण संस्थानों में पढ़ने जाते-आते हैं। इसी प्रकार यहां के व्यापारी भी रोजाना बड़ी संख्या में आना जाना करते हैं। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि रामगंज चौपड़ पर सबसे ज्यादा ई- रिक्शा दिखाई देते हैं। क्योंकि यहां से बड़ी संख्या में ई-रिक्शा से लोग आना-जाना कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकार रामगंज-चौपड़ पर मेट्रो स्टेशन नहीं बनाती है तो उचित नहीं कहा जा सकता है। भाजपा सरकार चाहे तो अपने निर्णय पर पूर्ण विचार कर सकती है। लेकिन रामगंज चौपड़ पर मेट्रो स्टेशन नहीं बनाना यहां की जनता के साथ पक्षपात ही माना जाएगा।
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