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मध्य प्रदेश में मेलियोडोसिस का खतरा: सीएम मोहन यादव ने तत्काल रोकथाम के दिए निर्देश

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मध्य प्रदेश में मेलियोडोसिस बीमारी के खतरे और सीएम मोहन यादव के रोकथाम निर्देश

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मध्य प्रदेश (एजेंसी)। एम्स भोपाल की चौंकाने वाली रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मेलियोडोसिस बीमारी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यह एक खतरनाक बैक्टीरियल बीमारी है जो टीबी (क्षय रोग) जैसी दिखती है और मध्य प्रदेश के धान किसानों के लिए बड़ा खतरा बन रही है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य के 20 से ज्यादा जिलों में मेलियोडोसिस के मामले मिले हैं। इसका सीधा संबंध धान की खेती बढ़ने और पानी के अधिक स्रोत बनने से है। यह बीमारी पैदा करने वाला बैक्टीरिया Burkholderia pseudomallei गीली मिट्टी और रुके हुए पानी में तेजी से पनपता है।                                                      यह वीडियो भी देखे :-                                       https://youtu.be/dQPyn2Waa4s

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सबसे ज्यादा खतरा धान के गीले खेतों में नंगे पांव काम करने वाले किसानों को है। इसके अलावा, शुगर (डायबिटीज) के मरीज और अत्यधिक शराब पीने वाले लोग भी इस बीमारी की चपेट में आसानी से आ सकते हैं।

सीएम यादव ने स्वास्थ्य और कृषि विभाग के प्रमुख सचिवों को मिलकर जांच, इलाज और जागरूकता अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा, “किसानों और आम जनता का स्वास्थ्य और खुशहाली हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है,”।

गांवों में लोगों को बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीके बताए जाएंगे। अगर किसी में लगातार बुखार, पुरानी खांसी या सीने में दर्द जैसे लक्षण दिखें और टीबी की दवा से ठीक न हो, तो तुरंत इलाज की व्यवस्था की जाएगी।

उधर, एम्स भोपाल ने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया है ताकि वे टीबी जैसी दिखने वाली इस बीमारी को पहचान सकें और सही एंटीबायोटिक दवाएं दे सकें।

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सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे बरसात के बाद धान की खेती करते समय सावधानी बरतें और किसी भी अज्ञात बुखार या सांस की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और इलाज ही मौतों को रोकने का सबसे बड़ा उपाय है।

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