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क्षत्रिय स्वाभिमान अस्मिता महासम्मेलन 8 जून को नागौर में

Jaipur

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  • जाट और राजपूत समाज के बीच टकराव की संभावना बढ़ी
  • टकराव को रोकने के लिए सरकार को उठाने चाहिए कारगर कदम

जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल की ओर से राजस्थान के राजपूत राजाओं और मुगलों के बीच रिश्ते पर सोशल मीडिया पर कई बाते कहीं, जिनको राजपूत समाज और करणी सेना ने अपमानजनक बताया। दूसरी तरफ हनुमान बेनीवाल ने कहा कि में इतिहास में लिखी बाते ही बता रहा हूँ, इसमें झूठ कुछ भी नहीं हैं। दूसरी तरफ करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.  राज शेखावत ने बेनीवाल के बयान को अभद्र करार देते हुए सोशल मीडिया पर जवाबी हमला बोला और 8 जून 2025 को नागौर में “क्षत्रिय स्वाभिमान अस्मिता महासम्मेलन” का ऐलान कर दिया और बेनीवाल के मकान को बुलडोजर से तोड़ने की बात कहीं। करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत के साथ राजपूत समाज कितना है। लेकिन उन्होंने लाखों की तादात में समाज के लोगों और करणी सेना के कार्यकर्ताओं को नागौर पहुंचने का आह्वान किया है। राज शेखावत के बयान से पश्चिमी क्षेत्र के जाट समाज के लोग करणी सेना की चेतावनी देकर कह रहे है कि नागौर आने की भूल मत करना। इस घटनाक्रम से राजस्थान प्रदेश में जाट और राजपूतों में तनाव बढ़ सकता है। इसलिए सरकार को सचेत रहने की जरूरत है।

जाट – राजपूत राजनीति

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राजस्थान में जाट और राजपूत दबंग जातियों में शामिल है। राजपूत राजाओं ने प्रदेश की जनता पर राज किया है। राजपूत राजाओं की इतिहास में काफ़ी जानकारी मिलती है। स्वतंत्रता के बाद भी स्वर्गीय भैरोसिंह शेखावत प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। सैकड़ो राजपूत नेता विधायक और मंत्री प्रदेश सरकार में रह चुके है और वर्तमान सरकार में भी कई मंत्री मौजूद है। प्रदेश के जाट मुख्य रूप से किसान वर्ग में आते है।

जाट समाज के लोग राजस्थान में मेहनती और मजबूत कद काठी के पाए जाते है। अपनी मेहनत के सहारे जाट समाज ने राजस्थान का नया इतिहास बना दिया है। जाट समाज में शिक्षा का तेजी से प्रसार हुआ और समाज ने सरकारी नौकरियों में, व्यवसाय में तेजी से अपनी भागीदारी बढ़ाई है। जाट समाज का राजस्थान की राजनीति में बढ़ा वर्चस्व है। कोई भी पार्टी जाट समाज को वर्तमान में नजरंदाज नहीं कर सकती है। जाट समाज कांग्रेस, भाजपा और आरएलपी में बंटा हुआ है जबकि राजपूत समाज के लोग भाजपा से ज्यादा पाए जाते है। कांग्रेस पार्टी में बहुत कम राजपूत समाज के लोग पाए जाते है। जाट समाज के विधायक विधानसभा में बड़ी संख्या जीतकर आते है। जाट समाज के कई मंत्री वर्तमान सरकार में है और पहले भी सभी पार्टियों की सरकारों में रह चुके है। मुख्यमंत्री पद के अलावा राजस्थान में जाट समाज के लोगों ने अपनी मेहनत और राजनीति के बल पर सभी पद हासिल कर लिये है।

जाट-राजपूत में टकराव हुआ तो क्या होगा?

सरकार जाट राजपूतों के बीच टकराव होने नहीं देगी। यदि जाट राजपूतों के बीच टकराव हो भी गया तो सबसे पहले सरकार पर ही संकट आएगा। क्योंकि दोनों ही समाज प्रदेश के प्रभावशाली समाज है। सरकार दोनों में से किसी को भी नजरंदाज नहीं कर सकती है। हनुमान बेनीवाल जाटों के लोकप्रिय नेता है और उनके पक्ष में जाट एकजुट हो सकते है। इसलिए माना जा रहा है कि बेनीवाल पर या उनके घर पर किसी भी तरह का हमला प्रदेश में तूफान खड़ा कर सकता है। राज शेखावत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष है और राजपूत समाज में उनकी बात सुनी जाती है। इसलिए 8 जून को नागौर में राजपूत समाज के लोग एवं करणी सेना के कार्यकर्ता जरूर जाएंगे। दोनों समाजों के बीच प्रतिष्ठा का सवाल खड़ा हो गया है।

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सरकार को उठाने होंगे कारगर कदम

प्रदेश में जाट और राजपूत समाज प्रभावशाली समाज है। दोनों का आपस में टकराव प्रदेश की राजनीति के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता है। इस लिए सरकार को जाट राजपूत समाज के टकराव को रोकने के लिए समाजों और संगठनों के नेताओं के भड़काऊ भाषणों पर सख्ती से पाबंदी लगानी चाहिए। यदि एक बार टकराव हो गया तो सरकार इसे रोक नहीं पाएंगी। इसलिए टकराव रोकने के जो भी उपाय सरकार को करने है, 8 जून 2025 से पहले ही करने चाहिए। क्योंकि दोनों ही समाजों के युवा निडर और मरमिटने वाले हैं। दोनों समाजों का टकराव प्रदेश और समाज की बड़ी क्षति करेगा। भाजपा सरकार के लिए चुनौती भरा समय हैं। वैसे भाजपा पार्टी सोशल इंजीनियरिंग में माहिर पार्टी है। उसके नेता कोई न कोई हल निकाल ही लेंगे। राजस्थान में करीब 10 प्रतिशत जाट जाति के लोग एवं 8 प्रतिशत राजपूत समाज के लोग रहते है। दोनों जातियों का प्रदेश की राजनीति में वर्चस्व कायम करने के लिए संघर्ष और प्रयास चलते रहेंगे।

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