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भारत-पाकिस्तान क्रिकेट

जयपुर

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जयपुर (रॉयल पत्रिका)। देश में जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच की चर्चा होती है, तो लोगों में उत्साह भी होता है और आक्रोश भी। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान केवल पड़ोसी देश ही नहीं है, बल्कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला मुल्क भी है। हमारी सीमाओं पर आए दिन जवान शहीद होते हैं, निर्दोष लोग निशाना बनते हैं और उसके पीछे पाकिस्तान की साज़िशें साफ़ नज़र आती हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या हमें पाकिस्तान के साथ खेलकूद के रिश्ते रखने चाहिए? मेरा साफ़ मानना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता और हमारे देश के ख़िलाफ़ अपनी नीतियाँ नहीं बदलता, तब तक भारत को पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का द्विपक्षीय क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए। कांग्रेस पार्टी ने भी यही रुख अपनाया है कि सरकार और बीसीसीआई को इस विषय में एकसमान नीति अपनानी चाहिए। एक तरफ़ हम कहते हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद का गढ़ है, वहीं दूसरी तरफ़ उसके साथ क्रिकेट मैच खेलना हमारे शहीद जवानों और उनके परिवारों की भावनाओं के साथ न्याय नहीं होगा। खेल का उद्देश्य भाईचारे और मेलजोल को बढ़ाना होता है, लेकिन जब पड़ोसी देश लगातार नफ़रत और हिंसा को बढ़ावा दे रहा हो, तब क्रिकेट खेलकर हम ग़लत संदेश देंगे। हमें पहले अपनी सुरक्षा, अपने सैनिकों के सम्मान और अपने देशवासियों की भावनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। मेरा मानना है कि आज ज़रूरत इस बात की है कि हम एक मज़बूत संदेश दें – भारत आतंकवाद को कभी स्वीकार नहीं करेगा। और जब तक पाकिस्तान इसमें बदलाव नहीं लाता, तब तक उसके साथ क्रिकेट के मैदान साझा करना सही नहीं है।

डॉ. मोहम्मद शोएब (सचिव, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी)

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