हिंदू-मुस्लिम एकता समिति जयपुर में कई बरसों से दिखा रही मेल-मिलाप का नया रास्ता
- जयपुर की गंगा-जमुनी तहजीब को जमीनी स्तर पर दिया नया जीवन
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। राजधानी जयपुर से ईद के मौके पर एक ऐसी मिसाल सामने आई थी, जिसने समाज में भाईचारे और एकता की भावना को और भी मजबूत कर दिया है। ईद के दिन जयपुर के दिल्ली बाईपास स्थित ईदगाह पर ‘हिंदू-मुस्लिम एकता सामाजिक समिति, शास्त्री नगर’ की ओर से एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें हिंदू समुदाय के लोगों ने नमाज अदा कर लौट रहे मुस्लिम नमाजियों का गुलाब की पंखुड़ियों से स्वागत किया। इस आयोजन ने गंगा-जमुनी तहजीब की बेहतरीन झलक दिखाई और यह संदेश दिया कि भारत की खूबसूरती उसकी सांझी संस्कृति में है। भगवा कुर्ता और गमछा पहने समिति के सदस्यों ने मंच से फूलों की वर्षा कर नमाजियों को ईद की मुबारकबाद दी। इस आयोजन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर सराही गई। यह कार्यक्रम ‘हिंदू-मुस्लिम एकता सामाजिक समिति, शास्त्री नगर, जयपुर’ द्वारा आयोजित किया गया था जो बीते चार वर्षों से यह आयोजन कर रही है। इस समिति का गठन 2018 में किया गया था, जब शास्त्री नगर क्षेत्र में कुछ उपद्रवों के चलते सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था। इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों जिनमें ज्ञानचंद खंडेलवाल, फिरोजुद्दीन, निजामुद्दीन भाटी, कैलाश चंद यादव, मजहर हुसैन और अन्य गणमान्य लोगों ने मिलकर इस समिति की स्थापना की। समिति को 2022 में आधिकारिक रूप से पंजीकृत कराया गया। समिति का मुख्य उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखना, समाज में भाईचारे को बढ़ावा देना और पुलिस एवं जनता के बीच सकारात्मक संबंध स्थापित करना है। इसके तहत समिति समय-समय पर नागरिक सम्मान, स्वास्थ्य शिविर और अन्य जनहितकारी कार्यक्रम भी आयोजित करती है।

समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष फिरोजुद्दीन से खास बातचीत

‘हिंदू-मुस्लिम एकता सामाजिक समिति” के वरिष्ठ उपाध्यक्ष फिरोजुद्दीन ने बताया कि समिति की स्थापना लगभग पाँच साल पहले हुई थी और 2022 में इसे आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया। इस समिति की स्थापना का ख्याल तब आया जब जयपुर के शास्त्री नगर क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव की घटनाएँ हुईं, जिससे शहर का माहौल बिगड़ गया। इससे यह महसूस हुआ कि एक ऐसी समिति होनी चाहिए जो सभी समुदायों को जोड़कर आपसी भाईचारा और शांति बनाए रखने का प्रयास करे। समिति ने विभिन्न समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाकर चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से अध्यक्ष, सचिव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आदि पदाधिकारियों का चयन किया। वर्तमान में इस समिति के 100 से अधिक सक्रिय सदस्य हैं। फिरोजुद्दीन ने बताया कि समिति का मुख्य उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखना है। शुरुआत में हिंदू त्योहारों जैसे रामनवमी, दशहरा, गणेश चतुर्थी आदि पर फूल बरसाने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। इसके बाद यह विचार आया कि यदि हिंदू त्योहारों पर ऐसा किया जा सकता है, तो मुस्लिम त्योहारों पर भी ऐसा होना चाहिए। इसी सोच के साथ समिति ने ईद के अवसर पर भी फूल बरसाने की परंपरा शुरू की, जो पिछले चार वर्षों से लगातार जारी है। इस वर्ष के आयोजन में लगभग 18-20 हिंदू भाइयों ने भाग लिया और महासचिव फिरोजुद्दीन सहित अन्य लोगों ने गुलाब की पंखुड़ियाँ बरसाईं। आयोजन की तैयारी पुलिस प्रशासन की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था के साथ की गई, जिससे यह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। वरिष्ठ उपाध्यक्ष फिरोजुद्दीन के अनुसार, समिति भविष्य में भी ऐसे आयोजन जारी रखेगी। इसके अलावा, समिति ने 2022 में जयपुर के शास्त्री नगर थाने में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें हिंदू समुदाय के लोगों को आमंत्रित किया गया और इस्लामिक विद्वानों द्वारा हजरत मोहम्मद साहब की सीरत (जीवन) पर व्याख्यान दिलवाया गया। यह संभवतः राजस्थान में पहली बार हुआ कि किसी थाने में इस्लामिक विद्वान ने नबी की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। इस पहल से दोनों समुदायों के बीच बेहतर समझ और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा मिला। फिरोजुद्दीन ने बताया कि ईद के इस आयोजन की प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक रही। मुस्लिम भाइयों ने हिंदू भाइयों को गले लगाकर ईद की बधाइयाँ दीं। हिंदू भाई भी भगवा टीका लगाकर और सिर पर रुमाल डालकर इस आयोजन में शामिल हुए। यह देखकर लोगों को लगा कि प्रेम और भाईचारे की भावना ही सबसे बड़ी चीज़ है। इस पहल से लोगों में एक नई उम्मीद जगी है। फिरोजुद्दीन का मानना है कि सांप्रदायिक एकता को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि युवाओं को एक-दूसरे के धर्म और संस्कृति से परिचित कराया जाए। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में ऐसे मंच स्थापित किए जाएँ, जहाँ दोनों समुदायों के विद्वान कुरआन और वेदों के सही अर्थ को सामने रखकर एकता का संदेश दें। यह धार्मिक कट्टरता को दूर करने में मदद करेगा। समिति इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
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