Loading...

ग़ज़ल

Jaipur

Follow us

Share

किसी  भी   मोड़  से  मुझको न अब सदा देना।

तमाम   नक़्श    मुहब्बत   के  तुम  मिटा  देना।।

Advertisement

 

चलो   तबाही   पे   मेरी   उन्हें   मलाल तो  है।

तसल्ली   टूटे  हुए  दिल  को    और क्या  देना।।

 

हमेशा  कुफ्र ने  ईमान को  जिला बख़्शी।

जहाँ  भी  बुत  मिले  कोई तो सर झुका देना।।

 

वो   जिससे  टूट  गिरेंगे  ये  नफ़रतों  के  पहाड़।

तू   वो   चिराग़   मुहब्बत  का  मत बुझा  देना।।

 

किसी ने आज तलक कुछ नहीं दिया “अनवर”।

में  चाहता  हूँ मुझे  तुम  भी   बददुआ देना।।

 

Advertisement

शकूर अनवर, कोटा, राजस्थान

9460851271

Disclaimer

Royal Patrika is an independent news portal and weekly newspaper. Content is published for informational purposes only. Royal Patrika does not take responsibility for errors, omissions, or actions taken based on published information.

Royal Patrika एक स्वतंत्र समाचार पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र है। यहां प्रकाशित सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है। प्रकाशित जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय, त्रुटि या नुकसान के लिए Royal Patrika जिम्मेदार नहीं होगा।