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78 साल बाद भी देश में गरीबी बैरोजगारी एवं वैमनस्य में कमी नहीं आ रही है    

जयपुर

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देश 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से स्वतंत्र हुआ था लेकिन आज भी भारत विकासशील देश की श्रेणी में आता और जबकि चीन और जापान भारत से कहीं आगे दिखाएं देते हैं

एम खान

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जयपुर (रॉयल पत्रिका)। भारत देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था। देश की स्वतंत्रता में अपनी जानों की कुर्बानी देने वाले भारतीय सूरवीरों ने सोचा होगा कि अंग्रेजों की गुलामी से छुटकारा पाने के बाद प्रत्येक भारतीय स्वाभिमान से और बिना किसी डर के अपना जीवन यापन कर सकेगा और सभी को रोटी-कपड़ा और मकान की सुविधा मिलेगी इसलिए लाखों भारतीयों ने अपनी जानों  की  कुर्बानियां अंग्रेजों को देश से बाहर निकलने में दी। जिन भारतीयों ने देश को स्वतंत्र करवाने में संघर्ष किया और कुर्बानियां दी अगर वे  आज होते तो उनको बहुत पछतावा होता है।  देश से अंग्रेजों को तो भगा दिया गया लेकिन उसके बाद लोगों के ऐसे समूहो, वर्गों, जातीयों,  धार्मिक समूहों  ने ले लिया जो समाज में अपने से कमजोर व्यक्तियों, मजदूरों, जातियों एवं धार्मिक वर्गों को गुलाम बनाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।  देश का कमजोर वर्ग चाहे वह किसी जाति, धर्म एवं वर्ग का हो उसके लिए स्वतंत्रता नाम मात्र की रह गई है।  देश का संविधान एवं कानून ज्यादातर उन लोगों का संरक्षण कर रहा है जो आर्थिक रूप से मजबूत और सुविधा संपन्न है।

 

देश में गरीबी, बेरोजगारी की स्थिति-

वैसे तो देश 15 अगस्त को 79 वां स्वतंत्रता दिवस का आयोजन कर रहा है।  लेकिन देश का युवा, मजदूर, किसान अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं।  देश में गरीब लोगों की संख्या में कमी नहीं आ रही और बेरोजगार युवाओं की सड़कों पर भीड़ देखने को मिल रही है। 78 वर्षों में कई राजनीतिक पार्टियों की सत्ता आती जाती रही है लेकिन देश को आगे ले जाने के बजाय  राजनीतिक पार्टियों एवं उनके नेताओं ने अपने घरों को भरने का काम किया है।  देश में स्वास्थ्य,  शिक्षा, सफाई एवं सड़कों की हालत अच्छी नहीं है। सरकारी कार्यालयों  में बिना लेनदेन किए  काम करवाना मुश्किल हो गया है। देश में सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ दिखाई देती है और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब वर्ग के बच्चे जर्जर भवनों के गिरने से दबकर मौत  के मुंह में जा रहे हैं।  कोई भी सरकार सत्ता में आने के बाद कुर्सी छोड़ना नहीं चाहती है लेकिन जनता के दबाब में चुनाव करवाने पड़ते हैं।  अब तो राजनीतिक पार्टियों चुनाव आयोग जैसी संस्था में अपने पक्ष के लोग बिठाकर  जनाधार  और वोटो की चोरी करवाने लगे हैं।  इसका मतलब साफ है कि देश से डेमोक्रेसी को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं विधायिका   पूरी तरह अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रही है।  अगर ऐसे ही चला रहा तो देश आर्थिक शक्ति एवं विकसित बनने की जगह अराजकता की ओर जा सकता है।

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नफरत और वैमनष्यता-

भारत देश विभिन्न धर्म संप्रदाय, जातियों,  बहू संस्कृति एवं परंपराओं का देश है।  सभी की  मान्यताएं एवं विश्वास  अलग-अलग है । स्वतंत्रता के समय देश के क्रांतिकारीयों,  देशभक्ति एवं देश को आजाद करवाने वाले नेताओं ने सबको  एकता के गुलदस्ते में एक किया था।  परिणाम स्वरुप देश को गुलाम बनाने वाले शासक अंग्रेजों को देश की जनता के सामने घुटने टेकने पड़े थे और देश स्वतंत्र हो गया। देश को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने संविधान दिया जिसमें सभी को सम्मान से जीने, स्वतंत्रता पूर्वक अपने विचार व्यक्त करने, घूमने,  रहने  एवं पहने  के समान अवसर प्रधान किए गए। लेकिन स्वतंत्रता के बाद नेताओं एवं  राजनीतिक पार्टियों ने देश के संविधान को कमजोर करने की पूरी कोशिश की है।  देश की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास तेजी से किए  जा रहे हैं।  जाति, वर्ग एवं धर्मों के बीच नफरत बढ़ा  कर राजनीति की जा रही है।  राजनीति सिर्फ सत्ता में रहने और  टिके रहने के लिए की जा रही है। संविधान में जातियों, धर्मों  एवं वर्गों के बीच आपसी भाईचारे एवं समाजस्य  से रहने का प्रावधान है लेकिन वर्तमान में आपसी भाईचारे एवं समाजस्य  को कमजोर और समाप्त करने का प्रयास चल रहा है। इन सबके बावजूद देश आगे बढ़ रहा है। इसलिए कहा जाता है कि मेरा देश भारत महान है।

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