ध्रुवपद यात्रा 2025: चौथे दिन का रंगारंग समापन, संगीत और विरासत का अद्भुत संगम
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)।ध्रुवपद यात्रा 2025 का चौथा दिन भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत और ध्रुवपद परंपरा के गौरवशाली स्वरूप का एक अनूठा उत्सव बना। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, राजस्थान सरकार के कला और संस्कृति विभाग, राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) और राजस्थान राज्य खान व खनिज लिमिटेड के सहयोग से आयोजित इस भव्य आयोजन ने श्रोताओं को एक संगीतमय यात्रा पर ले जाने में सफलता प्राप्त की। यह प्रतिष्ठित उत्सव उस्ताद इमामुद्दीन खान डागर भारतीय संगीत कला और संस्कृति सोसायटी और डागर अभिलेखागार संग्रहालय, जयपुर के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। आयोजन की परिकल्पना और दिशा शबाना डागर और इमरान डागर के कुशल नेतृत्व में हुई, जिन्होंने ध्रुवपद की इस अनुपम परंपरा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का कार्य किया।


- शास्त्रीय संगीत का अनूठा मंच
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक तिलक समारोह और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ, जहां गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से आयोजन की गरिमा को बढ़ाया। इसके बाद, संगीत प्रेमियों को एक के बाद एक उत्कृष्ट ध्रुवपद प्रस्तुतियों का अनुभव मिला, जो भारतीय संगीत की गहराई और भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति का प्रमाण थीं।
- विशिष्ट प्रस्तुतियाँ
अकीको नेजो (जापान) – प्रसिद्ध गुंडेचा ब्रदर्स की शिष्या अकीको नेजो ने राग यमन में चौताल की एक प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उनके साथ पखावज वादक श्री ध्यानेश्वर देशमुख ने संगत की, जिससे भारतीय संगीत की वैश्विकता का सुंदर प्रदर्शन हुआ।

निलोय अहसन – डागरवाणी ध्रुवपद परंपरा के उस्ताद एफ. वफीसुद्दीन डागर के शिष्य निलोय अहसन ने अपने गहरे आलाप और जटिल सूक्ष्म भावों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने पखावज वादक पंडित प्रवीण आर्य के साथ राग बसंत पंचम में “आयो री बसंत ऋतु, खिले फूल बहार” की एक अद्भुत प्रस्तुति दी।
मलिक ब्रदर्स – पं. प्रशांत मलिक एवं पं. निशांत मलिक – दरभंगा ध्रुवपद परंपरा के इन प्रतिष्ठित कलाकारों ने राग कौशिक कान्हड़ा (धमार) और राग बसंत (सूल) में मनमोहक प्रस्तुति दी। उनके साथ पखावज पर श्री आदित्य दीप ने संगत की।
- डागर अभिलेखागार संग्रहालय: ध्रुवपद विरासत का अनूठा खजाना
इस अवसर पर जयपुर स्थित डागर अभिलेखागार संग्रहालय ने एक विशेष कला प्रदर्शनी का आयोजन किया, जिसमें डागर घराने की दुर्लभ धरोहर को प्रस्तुत किया गया। इस प्रदर्शनी ने संगीत प्रेमियों को ध्रुवपद के ऐतिहासिक आयामों और महान उस्तादों के योगदान से अवगत कराया। कार्यक्रम के अंत में शबाना डागर और इमरान डागर ने सभी कलाकारों को पारंपरिक शॉल भेंट कर सम्मानित किया। इसके साथ ही, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, राजस्थान सरकार के कला और संस्कृति विभाग, राजीविका, राजस्थान राज्य खान और खनिज लिमिटेड सहित सभी सहयोगियों और संरक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। ध्रुवपद यात्रा 2025 ने यह सिद्ध कर दिया कि संगीत की परंपरा और विरासत न केवल जीवित है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। इस भव्य आयोजन ने ध्रुवपद के गहरे आध्यात्मिक और कलात्मक स्वरूप को पुनः उजागर किया और श्रोताओं के मन में इसकी अनुगूंज को सदा के लिए बसा दिया।
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