100 वर्षों पुराने मजारों को नया बताकर जयपुर का माहौल बिगाड़ने की सोची समझी राजनीति
महारानी कॉलेज की स्थापना से भी पुरानी हैं मजारें
जयपुर (रॉयल पत्रिका) I जयपुर लड़कियों की शिक्षा का प्रमुख संस्थान महारानी कॉलेज आजकल शिक्षा के बजाये तीन मजारों के विरोध के लिए चर्चा में है I महारानी कॉलेज प्रिंसिपल कार्यालय के पास बनी इन तीन मजारों के विरोध में “धरोहर बचाओ मंच” के अध्यक्ष भरत शर्मा, हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य और कई हिंदू संगठन आंदोलन में भाग ले चुके हैं और इन तीन मजारों को महारानी कॉलेज परिसर से हटाने की मांग कर चुके हैं I विरोध करने वाले ज्यादातर लोग और संगठन भाजपा से संबंधित हैं I मजारों के विरोध के पीछे जाकर गहराई से रिसर्च किया जाए तो भविष्य की राजनीति की दिशा छिपी दिखाई देती है I मजारों की आड़ में एक झूठ और कृत्रिम वातावरण बनाकर लैंड जिहाद, नफरती, आतंकवादी जैसे शब्दों से एक समुदाय को संबोधित किया गया, जबकि महारानी कॉलेज में बनी इन मजारों को नया बताकर जयपुर के सद्भाव एवं भाईचारा को खराब करने की राजनीति दिखाई दे रही है I

100 वर्षों से भी पुरानी हैं मजारें
जयपुर निवासी सलीम खान का कहना है कि यह हमारे बुजुर्गों की मजारें हैं, हम यहां बचपन से ही अपने दादा-दादी, अम्मी-अब्बा के साथ जाया करते थे और अभी भी जाते हैं I सलीम खान की उम्र इस समय करीब 65 वर्ष है I सलीम खान का कहना है कि यहां हमारा मकान भी है, पहले हमारा परिवार यही रहता था I यहां हमारी बहुत बड़ी जमीन है, जो राज परिवार के द्वारा दी गई थी I ये मजारें महारानी परिसर में आपसी भाईचारा और सद्भाव की मिसाल के लिए भी पहचान रखती हैं I सलीम खान ने बताया कि विवाद होने पर मजारों और जमीन के कागज जिला कलेक्टर को उपलब्ध करवा दिए हैं I प्रशासन ने पांच सदस्यों की एक कमेटी बनाई है, जो जल्द ही विवाद पर अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को देगी I वैसे प्रशासन ने विरोध करने वालों को मजारों को कोई नुकसान नहीं पहुचाने दिया गया है I लेकिन जयपुर में आश्चर्यजनक रूप से 100-150 वर्ष पुराने मजारों को नया बताकर जिस तरह कृत्रिम माहौल बनाकर, सांप्रदायिक माहौल खराब करने की एक कोशिश है I

-महारानी कॉलेज की स्थापना 1944 में
महारानी कॉलेज की स्थापना 1944 में जयपुर में की गई थी I सवाई मानसिंह द्वितीय और महारानी गायत्री देवी के संरक्षण एवं इच्छा से महारानी कॉलेज की शुरुआत की गई थी I महारानी गायत्री देवी चाहती थीं कि उनके शासन में महिलाओं को भी बराबरी की शिक्षा दी जाए I इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए महारानी कॉलेज की स्थापना की गई I महारानी कॉलेज परिसर में तीनों मजारें महारानी कॉलेज की स्थापना से काफी पहले से मौजूद हैं I
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