ख़ुशी अंतहीन चाहिए
यह शायरी फ़ज़लुर्रहमान की कलम से निकली एक गहरी सामाजिक और रूहानी सोच का प्रतिबिंब है। इसमें इंसान की अंतहीन खुशियों की तलाश, हर चेहरे पर मुस्कान की ख्वाहिश, और रूहानी इबादत की सच्चाई को शिद्दत से बयां किया गया है। शायर सत्ता, समाज और धार्मिक पाखंड पर सवाल उठाते हुए इंसानियत, रोटी, मकान और अमन की मांग करता है। शायरी का हर शेर सोचने पर मजबूर करता है कि… Read More
