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भाजपा की सरकारें और देश का मुसलमान

Jaipur

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  • भाजपा की सरकारों ने देश के मुसलमानों की शिक्षा, उसके शिक्षण संस्थान, उनकी भाषा, उनके धर्म और वजूद पर ऐसे हमला बोल रखा है जैसे पूरे समुदाय के खिलाफ अघोषित जंग का ऐलान कर रखा हो।

भाजपा के सरकारों ने देश के मुसलमानों की शिक्षा, उसके शिक्षण संस्थान, उनकी भाषा उनके धर्म और वजूद पर ऐसे हमला बोल रखा है जैसे पूरे समुदाय के खिलाफ अघोषित जंग का ऐलान कर रखा हो। भाजपा के नेताओ में होड़ मची हुई हैं कि कौन सबसे ज्यादा मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयान देगा। जो ज्यादा नफरत फैलाने वाले बयान देगा वही भाजपा का बड़ा नेता कहलाएगा। हाल के दिनों में मुसलमानों को होली और रमजान को लेकर टारगेट किया है। देश में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब होली और रमजान साथ आए हो। लेकिन इससे पहले सब ने आपस में भाईचारे से इसका आयोजन किया था। मुसलमान शांति से जुम्मे की नमाज अदा करते थे और हिंदू भाई प्रेम से अपने होली का त्यौहार मनाते थे। लेकिन इस बार होली के बहाने मुसलमानों का टारगेट किया गया और इसमें भाजपा के नेताओं ने अपने बयानों से देश के संविधान को ही तार-तार कर दिया। यूपी में बलिया से भाजपा विधायक केतकी सिंह ने तो सारी हदें पार कर दी। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से अपने क्षेत्र में एक अस्पताल बनवाने की मांग करते हुए मांग कर डाली कि इस अस्पताल में मुसलमानों के इलाज के लिए एक अलग से ही कमरा बना दिया जाए ताकि हिंदू बिना डर के अपना इलाज करवा सके। अब जरा कल्पना कीजिए कि विधायक आज अस्पताल में मुसलमानों के लिए अलग कमरे की मांग करती है। कल मुसलमानों के लिए अलग गांव की, अलग शहर की, शहर में अलग मोहल्ले अलग स्कूल की मांग करेंगी। विधायक का यह बयान देश के संविधान का खुला उल्लंघन है। क्योंकि संविधान तो गारंटी देता है कि सरकार देश के नागरिकों में धर्म, जाति, रंग लिंग किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं करेगी। इस विधायक का बयान संविधान के विरुद्ध है और कायदे से यूपी के उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग को स्वत संज्ञान लेकर इस संविधान वीरोधी बयान पर विधायक की विधायकी को खत्म करना चाहिए। लेकिन हर तरफ सन्नाटा है, कोई भी संवैधानिक संस्था अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी करने को तैयार नहीं है। क्योंकि मामला मुसलमानों से जुड़ा हुआ है और आज देश में एक नागरिक के तौर पर उनकी कोई हैसियत नहीं है। यूपी के एक मंत्री रघुराज सिंह तो विधायक केतकी सिंह से भी आगे निकल गए। उन्होंने सावर्जनीक रूप से कहा कि जिन मुसलमानों को होली पर रंग से परहेज है वे अपनी टोपी को रंग से बचने के लिए तिरपाल का बना बुर्का पहनकर घर से बाहर निकलें। इस सब में हैरानी की बात यह है इन नफरती बयानों पर भी कहीं से कोई कार्यवाही करने वाला नहीं है। अब बात करते हैं कि कैसे भाजपा सरकारों ने मुसलमानों की शिक्षा और शिक्षण संस्थानों पर हमला बोल रखा है। प्रधानमंत्री मोदी जी कहते थे कि वे मुस्लिम बच्चों के एक हाथ में कुरआन और एक हाथ में कंप्यूटर देखना चाहते हैं। लेकिन वे जब से प्रधानमंत्री बने हैं तब से लगातार अल्पसंख्यक मामलात विभाग का बजट कम कर रहे हैं और जो बजट में राशि घोषित होती है उसका 40 फीसदी भी खर्च नहीं करते हैं और बाकी घोषित बजट लेफ्स हो जाता है। उन्होंने प्रीमैट्रिक स्कॉलरशिप तकरीबन बंद कर दी है । जबकि इसके कारण गरीब मुस्लिमों के बच्चों की दसवीं तक की शिक्षा हासिल कर लेते थे। उच्च शिक्षा में मुसलमानों की भागीदारी बहुत कम थी तब मनमोहन सिंह की सरकार ने मुस्लिमों में उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ाने के मौलाना आजाद फेलोशिप योजना शुरू की थी ताकि इसके जरिए उनको स्कॉलरशिप देकर देश और विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने के अवसर उपलब्ध करवाए जा सके। लेकिन मोदी जी ने मौलाना आजाद फेलोशिप योजना को बंद कर दिया है। ताकि मुसलमानों के बच्चे उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर सके। अब बात करते हैं मुसलमानों के शिक्षण संस्थानों की व संविधान का अनुच्छेद 29,30 मुसलमानों को अपने शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उन्हें संचालित करने का अधिकार देता है। लेकिन भाजपा की सरकार मुसलमानों के हर शिक्षण संस्थान को बंद कर देना चाहती है। पहले तो यूपी सरकार ने जांच के नाम पर यूपी के सैकड़ों मदरसों को बंद किया फिर यूपी मदरसा बोर्ड अपने स्तर पर परीक्षा करवाने और डिग्री देने का अधिकार रखता था उस अधिकार को छिना गया। ऐसे ही असम में भाजपा के मुख्यमंत्री हेमंत विस्बा शर्मा ने असम के चार सौ मदरसों को बंद कर दिया और सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि असम में कोई मदरसा नहीं चलने देंगे। अब बात करते हैं मुस्लिमों के उच्च शिक्षा के शिक्षण संस्थानों की यूपी में योगी सरकार ने आजम खान द्वारा स्थापित रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी को बर्बाद कर दिया और आजम खान पर भैस चोरी, मुर्गी चोरी और बकरी चोरी जैसे सैकड़ों मुकदमे लगाकर उसे जेल में डाल दिया ताकि किसी भी तरह से जौहर यूनिवर्सिटी को बंद किया जा सके। ऐसा ही खेल असम के मुख्यमंत्री मेघालय में यूनिर्वसीटी स्थापित करने वाले मेहबूब उल हक साथ खेला गया। असम सरकार ने उनको जेल में डाल दिया। जबकि मेहबूब उल हक की यूनिवर्सिटी मेघालय में थी और उनके द्वारा स्थापित मेडिकल कॉलेज से मेघालय की जनता को बहुत फायदा हो रहा था। यहां तक कि यह यूनिवर्सिटी आस-पास के दर्जनों गांवों को गोद लेती थी और उन गांवों के बच्चों को मुफ्त में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक मुफ़्त उपलब्ध करवाती थी। लेकिन आज आजम खान और महबूब उल हक जेल में है अब बात करते हैं भाषा की, वैसे तो भाषा कोई धर्म नहीं होता है। लेकिन उत्तर भारत के ज्यादातर मुसलमान उर्दू बोलते हैं ऐसे यूपी के मुख्यमंत्री उर्दू से नाराज हो गए और उन्होंने विधानसभा में कह दिया कि उर्दू से सिर्फ कठम्मुल्ला पैदा होते हैं। उन्हे यह याद ही नहीं रहा कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की प्राथमिक शिक्षा उर्दू में ही हुई थी। ऐसे देश के 10 साल प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री आई के गुजराल साहब की भी प्रारम्भिक शिक्षा उर्दू में ही हुई थी। राजस्थान की भाजपा सरकार के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर तो खुले आम है कि स्कूलों में उर्दू नहीं चलने देंगे जबकि उर्दू राजस्थान में तृतीय भाषा के रूप से एक मान्यता प्राप्त भाषा है। उन सारी बातों से आसानी से समझा जा सकता है कि कैसे भाजपा की सरकारे मुसलमानों को कुचलनें की कोशिशें कर रही है। ऐसे में भी धर्म निरपेक्ष सोच वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे खुलकर इस अन्याय का मुकाबला करें क्योंकि यह हमारे देश के लोकतंत्र और संविधान पर हमला है।

                                                                           डॉ. एस खान

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