भाजपा सरकार भारत जोड़ो सेतु का नाम बदलने की तैयारी में, आदिवासी नेता के नाम पर रखने का प्रस्ताव
जयपुर। राजस्थान में भाजपा सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बनाए गए भारत जोड़ो सेतु का नाम बदलने पर विचार कर रही है। इसे लेकर संगठन स्तर पर काम भी शुरू हो चुका है। सरकार की मंशा है कि इस ब्रिज का नाम किसी आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर रखा जाए ताकि आदिवासी समाज में सकारात्मक संदेश जाए और भाजपा की पकड़ मजबूत हो। दरअसल, यह ब्रिज अक्टूबर 2022 में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान बनकर तैयार हुआ था। इसके उद्घाटन के बाद भारत जोड़ो यात्रा के तहत जब राहुल गांधी राजस्थान आए थे, तब मुख्यमंत्री गहलोत ने उन्हें इस ब्रिज का दौरा भी करवाया था। इसी वजह से कांग्रेस इस पुल को प्रतीकात्मक रूप से भारत जोड़ो यात्रा से जोड़कर देखती रही है।

हालांकि अब भाजपा नेता इस नामकरण को अनुचित मानते हुए बदलाव की मांग कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता पंकज मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर सेतु का नाम बदलने की सिफारिश की है। पत्र में कहा गया है कि यह पुल न तो भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा रहा, न ही यह कोई ऐसा ब्रिज है जो देश या राज्य की सीमाएं जोड़ता हो। ऐसे में ‘भारत जोड़ो’ नाम का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है।

मीणा ने सुझाव दिया है कि इस पुल का नाम आदिवासी समाज के स्वतंत्रता सेनानी लक्ष्मीनारायण झरवाल के नाम पर रखा जाए, जिससे आदिवासी समाज को सम्मान और प्रेरणा दोनों मिलेगी। इसी दिशा में पार्टी से जुड़े आदिवासी नेताओं से भी सरकार को समर्थन में पत्र लिखवाए जा रहे हैं। भाजपा के इस कदम को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह आदिवासी वोटबैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
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