आप नेता प्रशांत कुमार जायसवाल ने जंगल कटाई को विकास के नाम पर पर्यावरण विनाश कहा
डोल का बाढ़ विवाद….
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। राजस्थान की राजधानी जयपुर के डोल का बाढ़ क्षेत्र में जारी निर्माण कार्य और पेड़ों की कटाई के खिलाफ अब राजनीतिक हलकों में भी विरोध की आवाज़ बुलंद होने लगी है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत कुमार जायसवाल ने इस मुद्दे पर खुलकर भजन लाल सरकार की आलोचना की है और इसे “विकास के नाम पर पर्यावरणीय अपराध” करार दिया है।

उन्होंने कहा कि जनता, जंगल और जनांदोलन को कुचलना ही बीजेपी शासन का काम है। डोल का बाढ़ एक हरित क्षेत्र है जहां 2400 से अधिक परिपक्व पेड़ हैं। यह क्षेत्र हर वर्ष करीब 180-200 टन COD सोखता है, 240 टन ऑक्सीजन उत्पन्न करता है और लगभग 60 टन प्रदूषण फ़िल्टर करता है। साथ ही, यहां की हरियाली स्थानीय तापमान को 2-6°C तक कम करती है और वर्षाजल को भूमि में समाहित कर भूजल को 30% तक रिचार्ज करती है। लेकिन इस पारिस्थितिकी तंत्र पर संकट उस समय आया जब 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यहां फिनटेक पार्क बनाने की घोषणा की। विरोध के बावजूद 2024 में भजन लाल सरकार ने यहां चार नई परियोजनाओं पीएम यूनिटी -मॉल, राजस्थान मंडपम, आवासीय क्षेत्र और एक छोटा फिनटेक पार्क को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। रीको यूनिटी मॉल का टेंडर बद्री रॉय एंड कंपनी को दिया गया, परंतु इस टेंडर की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह न तो Eproc वेबसाइट पर है और न ही SPPP पोर्टल पर। जायसवाल ने कहा कि सरकार जिस जंगल को खत्म करने जा रही है, वह सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं बल्कि एक जिंदा, साँस लेता पारिस्थितिक इंफ्रास्ट्रक्चर है। यह वह सिस्टम है जो हमारे लिए ऑक्सीजन बनाता है, प्रदूषण हटाता है और जल संकट को नियंत्रित करता है। इसे उजाड़ना अपराध है, न कि विकास।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार राजस्व के नाम पर पर्यावरणीय संतुलन को दांव पर लगा रही है। उन्होंने कहा कि जनता को इस “हरित नरसंहार” के खिलाफ खड़ा होना होगा। जायसवाल ने बताया कि डोल का बाढ़ संघर्ष समिति द्वारा प्रस्तुत वैकल्पिक योजना का पार्टी द्वारा समर्थन किया गया है जिसमें Jaipur Eco-Biodi-versity and Climate Change Awareness Park की स्थापना का प्रस्ताव है। यह योजना 100 एकड़ जंगल की रक्षा करेगी जलवायु शिक्षा, रिसर्च और सतत पर्यटन को बढ़ावा देगी एक “Living Lab” और Climate Learning Hub के रूप में काम करेगी सरकार के लिए हरित राजस्व मॉडल प्रदान करेगी।

आप नेता ने स्पष्ट किया कि “जंगल बचाने की लड़ाई सिर्फ जयपुर की नहीं, पूरे राजस्थान की है। डोल का बाढ़ विवाद अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रह गया है, यह राजस्थान के विकास मॉडल और पारदर्शिता की परीक्षा बन चुका है। युवाओं के जुड़ने से यह आंदोलन और व्यापक रूप ले रहा है, और अब सवाल जनता से है “आप क्या चुनेंगे हरियाली या हरियाली की बलि पर बनाए गए मॉल?”
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