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बीकानेर

बीकानेर रेलवे स्टेशन का 471 करोड़ रुपये की लागत से ‘अमृत भारत स्टेशन’ योजना के तहत पुनर्विकास कार्य तेज़ी से जारी है। इसमें स्थानीय कला, हैरिटेज और आधुनिकता का संगम होगा। स्टेशन पर मुख्य व द्वितीय प्रवेश पर 9 मंजिला इमारत, एयर कोंकोर्स, लिफ्ट, एस्केलेटर, फुट ओवर ब्रिज, आधुनिक वेटिंग रूम, फूड कोर्ट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पर्यटक सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यात्री आवागमन के लिए 41… Read More

हिन्दुस्तान ज़िंक ने देबारी में कचरा संग्रहण के लिए दिए ईवी वाहन

 उदयपुर

हिन्दुस्तान ज़िंक ने देबारी में बिछड़ी और ज़िंक स्मेल्टर ग्राम पंचायतों को अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन सौंपे हैं, जिससे घर-घर कचरा संग्रहण को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास में योगदान के तहत की गई है। इससे लगभग 3 हजार परिवार लाभान्वित होंगे और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इस मौके पर पंचायत प्रतिनिधियों ने इस पहल का स्वागत किया, जो स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाने…

सावन की एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम आयोजित

कोटा

कोटा में नेशनल कांग्रेस वर्कर कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष आबिद खान और जिला अध्यक्ष नितिन गौतम ने शहीद स्मारक पर 'सावन की एक शाम शहीदों के नाम' कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य हाड़ौती और राजस्थान के लोगों तक सैनिकों की बहादुरी और देश की रक्षा के लिए उनके बलिदान की गाथा पहुँचाना था। कार्यक्रम में विभिन्न पदाधिकारियों और गणमान्य लोगों ने भाग लेकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी…

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जिला स्तरीय दो दिवसीय शारीरिक शिक्षक संगोष्ठी का समापन

कोटा

कोटा के जय मीनेश आदिवासी विश्वविद्यालय रानपुर में जिला स्तरीय दो दिवसीय शारीरिक शिक्षक संगोष्ठी का समापन हुआ। कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने शिक्षकों की समस्याएं सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। विधायक कल्पना देवी ने बच्चों को खेलकूद से जोड़ने पर बल दिया। शिक्षा मंत्री प्रतिनिधि ने भविष्य में प्रमोशन और नई भर्तियों की बात कही। इस अवसर पर शिक्षकों की 12 सूत्रीय मांगें सौंपी गईं और 13…

इमरजेंसी के हालात में क्या ड्रोन से होगी ब्लड डिलीवरी? ट्रायल से जगी उम्मीदें

Jaipur

भारत में हेल्थकेयर सेक्टर में ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ब्लड और मेडिकल सप्लाई की इमरजेंसी डिलीवरी में एक नया कदम साबित हो रहा है। तेलंगाना, कर्नाटक और उत्तराखंड में ड्रोन द्वारा ब्लड डिलीवरी के सफल ट्रायल हुए, जिससे मुश्किल इलाकों में तेज़ डिलीवरी की उम्मीदें बढ़ीं। ड्रोन में GPS, तापमान नियंत्रित बॉक्स और लाइव ट्रैकिंग जैसी सुविधाएँ होती हैं, जिससे ब्लड की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है। हालांकि, इसके सामने रेगुलेटरी…

इस्लामिक कैलेंडर की इब्तिदा

Jaipur

इस्लामी कैलेंडर चांद से ताल्लुक रखने वाला कमरी कैलेंडर है जिसकी शुरुआत हिजरत नबवी के साल से हज़रत उमर फारूक रज़ि. अ. के दौर में हुई। इससे पहले अरब में तारीख के लिए वाकिआत का सहारा लिया जाता था। जब मुखतलिफ इलाकों में सरकारी खुतूत भेजे जाने लगे तो तारीख लिखने की जरूरत महसूस हुई। अकाबिर सहाबा के मश्वरे के बाद हिजरत नबवी के साल को इस्लामी कैलेंडर की बुनियाद…

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जैसा बाप वैसे बेटा

Jaipur

हज़रत उमर इब्न अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्लाह अलैह एक इंसाफ़ पसंद खलीफ़ा थे। एक दिन जब वह थकावट की वजह से आराम करना चाह रहे थे, उनके 17 साल के बेटे अब्दुल मलिक ने कहा कि क्या आप मज़लूमों की फ़रियाद सुने बिना ही सो जाएँगे? बेटा बोला कि किसकी गारंटी है कि आप ज़ुहर तक ज़िंदा रहेंगे। यह सुनकर हज़रत उमर की नींद उड़ गई, उन्होंने अपने बेटे को गले…

मेहनत या तक़दीर? ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सवाल

Jaipur

ज़िन्दगी में मेहनत और तक़दीर दोनों का ताल्लुक़ है। अल्लाह हर चीज़ को जानता और लिखता है, लेकिन इंसान को रास्ता चुनने की आज़ादी दी गई है। इस्लाम में मेहनत को छोड़ना जायज़ नहीं, बल्कि मेहनत करना ईमान का हिस्सा है। मेहनत करते रहना, दुआ करना और नतीजा अल्लाह पर छोड़ना सही तरीका है। यह बैलेंस इंसान को घमण्ड और मायूसी से बचाता है।

सच्चाई का समाज में अहम मुकाम

jaipur

सच्चाई पर पैग़ंबर की हदीस बताती है कि सच नेकी की तरफ़ और नेकी जन्नत की तरफ़ ले जाती है। अफसोस, आज मुसलमानों में झूठ और धोखा आम हो गया है, जिससे समाज में भरोसा खत्म हो रहा है। कुछ लोग यह सोचकर झूठ बोलते हैं कि उनकी नमाज़, रोज़ा और हज उन्हें बचा लेंगे, लेकिन यह शैतान का धोखा है। क़यामत के दिन जिनका हक़ मारा गया होगा, वे…

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इस्लामी हुकूमतों में जज़िया (टैक्स) धर्म परिवर्तन के लिए लगाया जाता था या शासन का खजाना भरने के लिए?

Jaipur

इस लेख में बताया गया है कि इस्लामी हुकूमत में जज़िया टैक्स गैर-मुस्लिमों से शासन चलाने और उनकी सुरक्षा के बदले लिया जाता था, न कि जबरन धर्म परिवर्तन के लिए। यह टैक्स केवल तंदुरुस्त, कमाने योग्य गैर-मुस्लिम मर्दों से लिया जाता था, महिलाओं, बच्चों, ग़रीबों और अक्षम लोगों से नहीं। उदाहरण के तौर पर हज़रत उमर रज़ि. ने एक बूढ़े ग़रीब ईसाई का खर्चा बैतुलमाल से दिया और आवश्यकता…

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