नोटिस में नहीं है दम, काम नहीं रोकेंगे हम, जेडीए को बिल्डर की खुली चुनौती
सादिक हिन्दुस्तानी
सांगानेर ( रॉयल पत्रिका ) I हीरानगर मुहाना मोड़ पर बिल्डर की जेडीए को खुली चुनौती। जेडीए की दस्तक के बाद भी नहीं रुका काम। नोटिस के बाद और जोर शोर से शुरू हुआ काम। अब सवाल यह उठता है कि क्या फाइल दफ्तर में दबा दी गई या फिर होगी कार्यवाही या फिर राजनैतिक दबाव के आगे झुकेगा जेडीए प्रशासन। या फिर बिल्डरों की तानाशाही के आगे जेडीए गांधी जी के तीन बंदरों की तरह अंधा, गूंगा, बहरा, बनकर तमाशबीन बना रहेगा। जी हां यह मामला है जयपुर विकास प्राधिकरण के जोन- 8 के मुहाना मोड श्रीजी नगर राजकीय महाविद्यालय के पास का। कुछ दिन पूर्व प्रकाशित खबर हीरा विहार मुहाना मोड में नियमों की उड़ रही है धज्जियां I विला बनकर तैयार, जेडीए मौन दर्शक क्यों ? कहीं कोई राजनीतिक दबाव में तो नहीं है जेडीए की चुप्पी, या फिर किसी बड़े सौदे का हो रहा है इंतजार। क्योंकि जेडीए के आने के बाद दिखावे के लिए थोड़ी देर के लिये बंद हुआ था काम। खबर के बाद कार्य की गति ने जोरदार पकड़ी है रफ्तार। बिल्डर की जेडीए को खुली चुनौती। जेडीए की दस्तक के बाद भी नहीं रुक रहा है काम। तीन अवैध विला तो बनकर हो गए हैं तैयार। तीन और नए अवैध विला का जोर शोर से हो रहा है काम। एक तरफ यहां बिजली पानी के कनेक्शन, रोड और लोन के बारे में बताकर एक विला को 50 लाख से 55 लख रुपए तक में बेचा जा रहा है। दूसरी तरफ जयपुर विकास प्राधिकरण का साफ कहना है कि गैर अनुमोदित कॉलोनी में जेडीए प्रशासन काम नहीं करेगा I ऐसे में विला खरीदने वाला चक्कर लगाता रहता है और उनके झांसे में आ जाता है। क्योंकि निर्माण स्थल पर ऐसा कोई अधिकृत नोटिस बोर्ड नहीं लगा है। जिससे यह जानकारी मिल सके कि यह जमीन जेडीए द्वारा स्वीकृत हुई है। बहुत सारे सवाल है, पत्र क्रमांक क्या है, भूखंड संख्या क्या है, भवन मानचित्र स्वीकृति कितनी है, कुल स्वीकृति ऊंचाई क्या है, स्वीकृति दिनांक क्या है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह सब काम जेडीए और बिल्डर की मिली भगत से हो रहा है। क्योंकि जयपुर विकास प्राधिकरण को हर बार राजनीतिक दबाव के आगे चुप रहना पड़ता है। जेडीए दिखावे के लिए नोटिस जारी करता है और बाद में सेटिंग होने के बाद सब कुछ सेट हो जाता है। यह है हमारे सांगानेर, प्रताप नगर, मानसरोवर की कहानी। पूछती है सांगानेर की जनता। अब सवालिया निशान यह है कि बतायेगा कौन ? तो जवाब यह है कि गांधी जी के तीन बंदर अंधे, गूंगे, बहरे, पट्टी बांधकर जो बैठे हुए हैं। चीखते चिल्लाते रहो और सुनते रहो I
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