रियासतकालीन परंपरा फिर जीवंत, गोविंद देवजी के भक्तों ने पाया प्रसाद
- ज्यौणार में उमड़ा जनसैलाब, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम 110 साल बाद जीवंत हुई रियासतकालीन परंपरा: गोविंद की नगरी में 50 हजार भक्तों को परोसा गया भक्ति का प्रसाद
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। जयपुर में रविवार का दिन भक्ति, परंपरा और भव्यता के अद्भुत संगम का साक्षी बना। 110 साल बाद ‘ज्यौणार’ की रियासतकालीन परंपरा को फिर से जीवंत किया गया। ‘जयपुर की ज्योणार’ के इस ऐतिहासिक आयोजन में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को दाल-बाटी-चूरमे का भक्ति प्रसाद परोसा गया। धार्मिक विरासत का यह अनुपम दृश्य सांगानेरी गेट स्थित अग्रवाल कॉलेज परिसर में देखने को मिला, जहां संत-महात्मा, समाज प्रमुख, व्यापार मंडल के प्रतिनिधि और आमजन – सभी ने साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धा और आस्था से भरे इस आयोजन ने पूरे शहर को भक्ति में रंग दिया। इस आयोजन की तैयारियां दो दिन पहले ही शुरू हो गई थीं। 500 हलवाइयों की टीम ने कंडों पर दिन-रात मेहनत कर तैयार किया प्रसाद 12,500 किलो आटा-बेसन, 1500 किलो दाल, 160 पीपा देसी गाय का घी, 1200 किलो मावा और शक्कर, साथ ही हजारों किलो हरी सब्जियां और मसाले – सब कुछ शुद्धता और पारंपरिक विधि से बनाया गया। भारी बारिश की संभावना को ध्यान में रखते हुए तीन विशाल वाटरप्रूफ डोम लगाए गए — जिनमें दो डोम 330×200 फीट और एक डोम 250×50 फीट का रहा। इन डोम्स में 1000 टेबल्स की व्यवस्था की गई थी, जहां एक साथ 4000 लोग बैठकर भोजन कर सके। भोजन का समय दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक निर्धारित किया गया और प्रवेश केवल कूपन धारकों के लिए रखा गया।
सुरक्षा और व्यवस्था में कोई कमी न रहे, इसके लिए

700 वेटर्स,
200 हलवाई सहायक,
100 पुलिसकर्मी,
100 प्राइवेट गार्ड,

और 500 वॉलंटियर्स लगातार सक्रिय रहे।
इस भव्य आयोजन की शुरुआत 11 जुलाई को जयपुर हेरिटेज महापौर कुसुम यादव द्वारा पूजन के साथ की गई थी। उन्होंने इसे केवल भोज नहीं, बल्कि राजस्थान सरकार की डेढ़ साल की उपलब्धियों का जनसंवाद और संस्कृति से जुड़ाव बताया। जयपुर में उमड़ा जनसैलाब, गोविंद भक्तों ने इसे भक्ति का उत्सव बताया। परंपरा और आस्था के इस महापर्व ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब शासन और समाज साथ खड़े हों, तो इतिहास फिर से वर्तमान बन सकता है।
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