Biryani : सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है बिरयानी की ओवरडोज
Biryani : सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है बिरयानी की ओवरडोज
दुनिया भर में जो भारतीय स्वाद सबसे ज्यादा मशहूर हैं, उनमें से एक बिरयानी भी है। इसे कई तरह से पकाया और परोसा जाता है। बिरयानी का नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। स्वाद में तो यह लजीज होती ही है, साथ ही इसकी महक भूख भी बढ़ा देती है। इसके मसाले, पारंपरिक सामग्री और परोसने का अंदाज सभी को अपनी ओर लुभाता है। मगर प्लेट में बिरयानी की ओवरलोडिंग आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। पर जब आप अपनी प्लेट इससे ओवरलोड कर लेती हैं, तब जानिए क्या होता है।
जब बिरयानी की बात आती है, तो दो ही जगह याद आती हैं। हैदराबाद और नवाबों का शहर लखनऊ। वैसे लखनवी बिरयानी और हैदराबादी बिरियानी दोनों काफी अलग होती हैं। दोनों को बनाने का तरीका भी अलग होता है। दुनिया भर से जो भी लखनऊ की सरजमी पर कदम रखता है, वह यहां के व्यंजन, खास तौर पर बिरयानी खाए बिना वापस नहीं जा पाता।


बिरयानी का स्वाद नवाबों के समय से चला आ रहा है। हालाकि अब बदलते भारत में बढ़ती तकनीकी के सहयोग से कोई भी रेसिपी छुपी नहीं रह गई है। बिरयानी के शौकीन लोग अक्सर अपने घर में ही बिरयानी बना लेते हैं। लेकिन बिरयानी को अपनी प्लेट में परोसने से पहले स्वास्थ्य से जुड़ी बातें जान लेना जरूरी है। फिर चाहे वह लखनवी बिरयानी हो हैदराबादी या जयपुर की।
पहले बिरयानी के स्वास्थ्य लाभ जान लेते हैं:

बिरयानी को बनाने में कई प्रकार के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माने जाते हैं। जिसमें लहसुन, अदरक, दालचीनी, और लौंग शामिल हैं। ये मसाले एंटी इंफ्लामेटरी गुणों, एंटी कैंसर, ब्लड शुगर को कम करने और और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने वाले गुणों से भरपूर हैं। इसके अलावा बिरयानी में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज और फाइबर जैसे पोषक तत्वों भी मौजूद होते हैं। पर जब आप अपनी क्रेविंग को कंट्रोल नहीं कर पातीं और प्लेट को बिरयानी से ओवरलोड कर लेती हैं, तब इसका खामियाजा आपकी सेहत को उठाना पड़ता है।
सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है बिरयानी की ओवरडोज:
बिरयानी को उच्च कैलोरी युक्त आहार के रूप में जाना जाता है, जिसमें प्रत्येक परोसने में औसतन 500 कैलोरी होती है, उनकी तैयारी में इस्तेमाल किया जाने वाला घी, वनस्पति और रेड मीट आपको पाचन संबंधी दिक्कतें दे सकते हैं।


फैटी लीवर का कारण बन सकती है बिरयानी: सिर्फ शराब से ही नहीं, बल्कि आपकी पसंदीदा मटन या चिकन बिरयानी के सेवन से भी आपके लीवर पर असर पड़ सकता है। जिससे आप नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर की शिकार हो सकती हैं। इसे विकसित देशों में सबसे तेजी से बढ़ती जीवनशैली की बीमारी के रूप में जाना जाता है। हर साल इस समस्या के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है।
क्या है नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर: इसका पूरा नाम नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज है। लिवर हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा है यह हमारे शरीर में मेटाबॉलिज्म को मेंटेन करने का काम करता है। हृ्रस्नरुष्ठ में लीवर में फैट जमा हो जाता है जिसका इलाज अगर समय पर नहीं कराया गया तो यह परमानेंट रोक के तौर पर भी उभर सकता है जो लिवर सिरॉसिस के तौर पर जाना जाता है। यह आगे चलकर कैंसर ही बन सकता है।
क्या होते हैं नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर के लक्षण? : ज्यादातर गति ही जीवन शैली और खराब खान-पान के कारण लोग इसके शिकार हो जाते हैं इसके लक्षणों में पेट में दर्द, सीने में दर्द, थकान शामिल है।
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