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नया वक्फ कानून मुसलमानों की शिनाख्त पर सीधा हमला है

Jaipur

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  • भाजपा सरकार ने अपने बहुमत के बूते नया वक्फ क़ानून बनाकर देश के मुसलमानों की शिनाख्त पर सीधा हमला किया है।

डॉ. एस. खान

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भाजपा सरकार ने अपनी बहुमत के बूते नया वक्फ कानून बनाकर देश के मुसलमानो की शिनाख्त पर सीधा हमला किया है। हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि कैसे इस कानून से मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों को छिना  गया है। कैसे इस कानून को बनाने के लिए झूठ पर झूठ बोलकर एक माहौल बना बनाया गया था और कैसे इस कानून के प्रावधानों से मुसलमानों की शिनाख्त पर हमला हुआ है। पहले हम यह देखते हैं कि कैसे इस कानून से मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला हुआ है। संविधान में दिए मूल अधिकारों में अनुच्छेद 15 (4) यह कहता है कि देश के सभी नागरिक समान है उनमें धर्म, जाति या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है। यदि वक्फ पर कोई कानून बनना था तो ठीक ऐसा ही कानून मंदिरों के ट्रस्टों, जैन समुदाय ट्रस्टों, सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और ईसाई धर्म की संस्थाओं के लिए भी बनना चाहिए था। लेकिन कानून बना सिर्फ मुसलमानों की जायदादों के बारे में। ऐसे में यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 15 (4) का सीधा उल्लंघन है। अब बात बात करते हैं संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 की इसमें मुसलमानों को स्पष्ट अधिकार दिया गया है कि वे अपने धर्म के लिए मस्जिदे बना सकते हैं, संस्थाएं बना सकते हैं और उनका संचालन कर सकते हैं। इस नए वक्फ कानून से मुसलमानों के इस अधिकार को छीना गया है, इससे साफ हो जाता है इस कानून के जरिए सरकार ने मुसलमानों के उन संवैधानिक अधिकारों को छीन लिया है। जो संवैधानिक अधिकार उसे देश के संविधान ने दिए थे। ऐसे में हम यह कह सकते हैं कि सरकार ने अपने बहुमत के बल पर एक असंवैधानिक कानून मुसलमानों पर थोप दिया है। अब बात करते हैं कि इस कानून को बनाने के लिए झूठ दर झूठ बोलकर इसकी पृष्ठ भूमि तैयार की गयी, माहौल बनाया गया। एक झूठ तो यह बोला गया की रेल्वे और रक्षा विभाग के बाद सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्ड के पास है और वह आठ लाख हेक्टयर है जो सच नहीं था। अकेले तमिलनाडु, तेलंगाना, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के मंदिरों के पास लगभग 16 लाख एकड़ जमीन है। यानी चार प्रदेशों में ही मंदिरों के पास वक्फ बोर्ड से दुगनी जमीनें हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है  कि पूरे देश में मंदिरों के पास कितनी जमीनें होंगी। अब बात करते हैं राजस्थान की तो प्रदेश में हर गांव में राजस्व रिकॉर्ड में मंदिर माफी की जमीनें है और जयपुर को तो मंदिरों को ठिकाना कहा जाता था और एक मंदिर के रखरखाव के लिए दर्जनों गांव दिए जाते थे। ऐसे में अकेले राजस्थान में मंदिर माफी की जमीनें वक्फ बोर्ड के बराबर होगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि मंदिर माफी की जमीनें बेची नहीं जा सकती है। लेकिन सच्चाई यह है कि आधी से ज्यादा जमीनों को पुजारीयों ने खुर्द-बुर्द कर दी है लेकिन सरकार को यह नजर नहीं आता है। दूसरा सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में यह कहा गया कि वक्फ बोर्ड से 12 हजार करोड़ की आमदनी हो सकती है लेकिन सरकार ने इस रिपोर्ट की भी अधूरी बातें कही है। यह तो कह दिया की रिपोर्ट में 12 हजार करोड़ की आमदनी की बात कही है लेकिन सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में तो यह भी कहा है कि सरकारों ने वक्फ बोर्डों की लगभग 4 हजार संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है, उसे खाली करें। अकेले दिल्ली में सच्चर कमेटी ने 123 जायदादों पर सरकारों का कब्जा माना था और 2006 में इनकी कीमत 7 हजार करोड़ रुपये बताई थी। सरकारों ने आज तक भी इन जायदादों को खाली नहीं किया है। मनमोहन सिंह की सरकार ने वक्फ जायदादों से आमदनी बढ़ाने के लिए वक्फ विकास परिषद बनाई थी जिसमें प्रावधान किया था कि प्राइम लोकेशन की जायदादों को विकसित किया जाएगा। लेकिन मोदी जी की सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में वक्फ विकास परिषद को एक रुपए नहीं दिया है। उससे आप समझ सकते हैं कि मुसलमानों की तरक्की में उनकी कितनी दिलचस्पी है। एक बात यह कही गई कि वक्फ की जायदादों की कमाई से वे गरीबों, महिलाओं का आर्थिक विकास करना चाहते हैं। तो मोदी जी मंदिरों के पास तो लाखों-करोड़ों रुपए बैंकों में जमा है। हजारों टन सोना है और दूसरी तरफ देश के 80 करोड़ लोग 5 किलो राशन पर गुजारा कर रहे हैं। ऐसे में आप कानून बनाकर मंदिरों का यह खजाना क्यों हिंदू दलितों, पिछड़ों, महिलाओं के आर्थिक विकास पर खर्च नहीं करते हैं। एक बात यह कही गयी की वक्फ बोर्डों में भ्रष्टाचार है। हाँ यह सच है इन बोर्डों में बहुत भ्रष्टाचार है। लेकिन आप देश का एक विभाग ऐसा बता दीजिए जिसमें भ्रष्टाचार ना हो। आप पिछले 11 साल में कितना भ्रष्टाचार कम कर पाए हैं। यह भी तो देश की जनता को बता दीजिए। अब बात करते हैं इसके प्रावधानों की, एक प्रावधान है कि यदि किसी संपत्ति पर विवाद होता है तो वह तब तक सरकार के पास रहेगी जब तक इसका फैसला नहीं होगा। फैसला कब होगा? इसकी कोई समय सीमा तय नहीं है। अब रही विवाद पैदा करने की तो इसको पैदा करने के लिए आपकी पार्टी में पूरी फौज खड़ी कर रखी है। जो फौज आज मस्जिदों के सामने नाच रही है। यही फौज हर दरगाह, मस्जिद और कब्रिस्तान पर विवाद खड़ा कर देगी। दूसरा प्रावधान है कि अब बोर्डों में गैर मुस्लिम सदस्य भी होंगे और केंद्रीय वक्फ बोर्ड और राज्य के वक्फ बोर्डों में बहुमत गैरमुस्लिमों का होगा यानि संपत्ति हमारी और हमारे बाप-दादाओ की और उसका संचालन करेंगे गैरमुस्लिम। क्या किसी मंदिर के ट्रस्ट में मुसलमान को शामिल किया सकता है? क्या जैनों के ट्रस्ट में किसी मुसलमान को शामिल किया जा सकता है? क्या सिखों के गुरुद्वारा प्रबंधन सरदार कमेटी में किसी गैर को शामिल किया जा सकता? इसमें शामिल नहीं किया जा सकता है। तो मोदी जी हमारे बाप- दादाओ की संपत्तियों की देखरेख में कैसे गैर मुस्लिम को शामिल किया जा सकता है।  मोदी जी आप वक्फ संपत्तियों के चरित्र को समझिए। यह कोई खाली जमीनें नहीं है। आधी संपत्तियां मस्जिदों की की हैं, दस फीसदी दरगाहें और बीस फीसदी कब्रिस्तान है और जो बीस फीसदी हैं उसमें भी आधी पर तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने कब्जा कर रखा है। अकेले राजस्थान की साठ प्राइम लोकेशनों की जमीनों पर राजस्थान सरकार और उसके विभागों का कब्जा है। इनसे साफ जाहिर होता है कि आपकी नीयत मुसलमानों का भला करने की नहीं है। आप अपने कार्यकाल का एक काम गिनवा दीजिए जो आपने मुसलमानों के भले के लिए किया हो। आप तो कपड़ों से उनकी पहचान करते हो। चुनावी सभाओं में उसे मंगलसूत्र और भैंस चुराने वाला बताते हो। दरअसल यह वक्फ कानून तो बहाना है। इसके जरिए आप मुसलमानों के खौफ पैदा करना चाहते हैं। उनकी मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों को निशाना बनाना चाहते हैं। इसलिए यह कानून तो बहाना है असल में उनकी शिनाख्त को निशाना बनाना है।

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