वक्फ बिल को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
- देश का वक्फ एमेंडमेट बिल ऐसा है जिससे हिंदुओं को और मुसलमानों को कोई आर्थिक फायदा पहुंचने वाला नहीं है।
- वक्फ बोर्ड की जमीनों पर पहले भी वक्फ माफियाओं का कब्जा था और वक्फ बोर्ड कमेटियों में सत्ता पक्ष के नजदीकी लोग थे। वक्फ संशोधित बिल के कानून बनने के बाद भी ऐसा ही रहने वाला है।
जयपुर, (रॉयल पत्रिका)। राष्ट्रपति द्रोपती मुर्मू ने शनिवार रात वक्फ संशोधित बिल 2025 को मंजूरी दे दी है। मुसलमान वक्फ (निरसन) बिल 2025 को भी राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद केंद्र सरकार ने इनकी अधिसूचना जारी की और दोनों बिल कानून बन गए। केंद्र की मोदी सरकार के अनुसार नए कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग और वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण रोकना है। यह बिल बुधवार को लोकसभा और गुरुवार को राज्यसभा में पारित हुआ था। वक्फ एमेडमेंट बिल 2025 देश का ऐसा बिल है जिसके देश के मुसलमानों और हिंदुओं को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होने वाला है। वक्फ बोर्ड करीब-करीब पहले जैसा ही चलेगा। कुछ महत्वपूर्ण वक्फ संपत्तियों को कलेक्टर के द्वारा सरकार अपने कब्जे में ले सकती है और कुछ पर से वक्फ के मालिकाना अधिकार समाप्त किए जा सकते हैं। पहले वक्फ कमेटियों में सिर्फ मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति ही शामिल हो सकते थे अब दूसरे समुदाय के व्यक्ति भी शामिल होंगे। वक्फ बोर्ड मैनेजमेंट कमेटी का चुनाव न होकर सरकार के द्वारा मनोनीत किया जा सकेगा। वक्फ अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास लाकर हटाने का प्रावधान नहीं होगा। वक्फ बोर्ड सीईओ पद पर पहले मुस्लिम समुदाय का अधिकारी होता था। अब किसी भी समुदाय का अधिकारी बन सकता है। इसके अलावा वक्फ बोर्ड कमेटी में पहले भी सरकार की पसंद के लोग शामिल किए जाते थे और अब भी सरकार की पसंद के लोग शामिल किए जाएंगे। वक्फ बोर्ड की वक्फ संपत्तियों पर पहले ज्यादातर मुस्लिम भूमाफिया जिनको आम बोलचाल की भाषा में वक्फ माफिया कहा जाता है का बोलबाला वैसा ही रहने वाला है।
वक्फ माफियाओं के कारण मुस्लिम समुदाय को वक्फ संपत्तियों का फायदा नहीं मिला

वक्फ बोर्ड मैनेजमेंट कमेटियों, दरगाह मैनेजमेंट कमेटियों, मुसाफिरखाना कमेटियों, एवं अन्य वक्फ संपत्तियों की कमेटियों में माफिया पनप गए। वक्फ माफियाओं की पहुंच विधायक, सांसद और मंत्रियों तक होने के कारण धड़ल्ले से वक्फ की जमीनों को बेचा गया और जो वक्फ की संपत्तियां नहीं बिक पाई उनको मुकदमा करके अदालतों के जरिए फंसा दिया गया। वक्फ बोर्ड मैनेजमेंट में शामिल लोग यदि ईमानदारी से काम करते तो मुस्लिम समुदाय के बच्चों की पूरी शिक्षा मुफ़्त मिल सकती थी, हजारों अस्पताल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, सामुदायिक भवन, मुसाफिरखाना एवं शानदार स्कूलों का निर्माण हो सकता था। लेकिन इन वक्फ माफियाओं ने मुस्लिम समुदाय और सरकारी सिस्टम को हमेशा ही गुमराह किया। इस स्थिति का फायदा केंद्र की भाजपा सरकार ने उठाया और नया वक्फ संशोधित बिल पास कर दिया। यदि इन वक्फ माफियाओं पर कांग्रेस या पहले की सरकारें नियंत्रण करती तो बहुत वक्फ संशोधित बिल लाने की जरूरत नहीं पड़ती।
वक्फ संशोधित बिल 2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ने इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधित बिल बनाने में संवैधानिक कानून एवं प्रावधानों का ध्यान नहीं रखा है। दूसरी तरफ देश की राष्ट्रपति ने इस बिल को मंजूरी दे दी है अब वक्फ संशोधित बिल 2025 कानून बन चुका है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी की संसद को राय

सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने राज्यसभा में अपनी राय व्यक्त की कि नये वक्फ संशोधित बिल के क्लोज 11 का हवाला देते हुआ कहा कि एक्ट में सफाई से कहा गया है कि वक्फ मैनेजमेंट कमेटी में 11 में से कम से कम 3 सदस्य मुस्लिम हो सकते हैं। उसको यह भी कर सकते हैं कि कमेटी में 11 में से 8 सदस्य गैर मुस्लिम होंगे। सभी सदस्यों को प्रदेश सरकार मनोनीत करेगी। चुनावी प्रक्रिया से कोई भी सदस्य नहीं चुना जाएगा। वक्फ बोर्ड का सीईओ मुस्लिम होना जरूरी नहीं होगा। अनुच्छेद 26 में अल्पसंख्यकों को अपने संस्थान स्वायत्तता, ऑटोनॉमस अधिकार से चलाने होते हैं लेकिन वक्फ बोर्ड कमेटी के अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है और ना ही हटाया जा सकता है। डॉ अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हिंदू धार्मिक और चैरिटेबल एडाउमेन्टस एक्ट, श्री जगन्नाथ मंदिर एक्ट, माता वैष्णो देवी श्राइन एक्ट, उत्तर प्रदेश काशी विश्वनाथ मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल अधिनियम आदि के अनुसार इस इन कमेटियों और ट्रस्टों में कोई गैर हिंदू व्यक्ति सदस्य सदस्य नहीं बन सकता है तो फिर वक्फ संशोधित एक्ट में मुसलमान के अलावा गैर मुस्लिम का प्रावधान कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसी तरह जमीन दान करने के प्रावधान के कानून संमत नहीं है। वक्फ बिल को बड़ी शातिर तरीके से तोड़ मरोड़ कर बनाया गया है। जिसको भविष्य में सर्वोच्च न्यायालय निरस्त कर सकता है।
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