सांचौर जिले की बहाली को लेकर करीब दो महीने पुरे होने आए, फिर भी धरना जारी
- अतिरिक्त जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंर्पा
सांचौर,(रॉयल पत्रिका)। सांचौर जिला बचाओं संघर्ष समिति का धरना लगातार जारी है लगभग दो माह पुरे होने वाले है प्रतिदिन अतिरिक्त जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम प्रतिदिन अलग-अलग गांव के ग्रामीण धरना स्थल पर पहुंच कर ज्ञापन सौंप कर जिला बहाली की मांग कर रहे है। पूर्व राज्यमंत्री सुखराम विश्नोई ने बताया कि सांचौर जिला जो जालौर जिले से 145 किमी दूर व अंतिम गांव आकोडिया रणखार करीब 250 किमी दूर है। जबकि वर्तमान सरकार द्वारा कौनसे आधार पर जिलों को निरस्त किया गया कोई स्पष्ट नहीं है। सांचौर जिला बनने से जिला मुख्यालय नजदीक होने पर आमजन के लोगों के सभी जिले स्तर के कार्य जल्द होने लगे व आर्थिक बोझ भी ज्यादा नहीं रहा। वर्तमान सरकार सांचौर जिले को किस आधार पर निरस्त किया, हमने सम्पूर्ण परूफ के साथ कोर्ट में याचिका दायर की है इसका न्यायपालिका निस्तारण करेंगे तथा वर्तमान सरकार ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर कार्यालय बंद कर पुनः खोला है, एडीएम कार्यालय से धरना समाप्त नहीं करने वाले है जबतक हमारा जिला घोषित नहीं होता तब तक हम धरना समाप्त नहीं करने वाले है। किसानों ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने सांचौर की जनता के साथ खिलवाड़ किया है साथ ही भेदभाव का रवैया अपना रही है। सांचौर जिला सही मापदण्ड अनुसार था तब सांचौर को जिला बनाया था उन मापदण्डों के आधार पर सभी नए जिले और संभाग बनाए थे, जिसको वर्तमान सरकार ने किस आधार पर निरस्त किया है। यह वर्तमान सरकार ने सांचौर की जनता के साथ अन्याय किया है सांचौर जिले को पुनःबनाकर रहेंगें। उन्होंने कहा कि किसी भी लोक कल्याणकारी सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि जनहित में लिए गए निर्णय किसी भी सरकार ने लिए हो प्रत्येक आने वाली सरकारे उन कार्यों को आगे बढ़ाती है परन्तु वर्तमान भाजपा सरकार ने पिछले डेढ़ साल से पूर्व सरकार के द्वारा किये गए कार्य व्यवस्थित तरीके से चल रहे थे जिससे सांचौर जिले को निरस्त कर बहुत बड़ी भूल की है। और कहा कि सांचौर जिले को किस आधार पर निरस्त किया गया, अगर जिला निरस्त करने योग्य था तो फिर एडीएम कार्यालय किस आधार पर खोला। इस दौरान रामावतार मांजू, सेंधाराम मेघवाल, भागीरथ कावा, मोहन लाल सारण, मांगीलाल, प्रतापाराम, जगदीशखोखर, भाखराराम विदार, जयकिशन, हीराराम, बाबुलाल, खेमाराम, हरिकिशन, खेतसिंह गोहिल, चेनाराम साहू सहीत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
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