नगर निगम जयपुर के चुनावों की चर्चा शुरू
वार्डों में पार्षद उम्मीदवार अभी से कर रहे तैयारी
– वार्डों के पुनर्गठन ने मौजूदा पार्षदों को मुश्किल में डाला

एम खान
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। जयपुर नगर निगम चुनावों की चर्चा शुरू हो गई है। नवंबर 2025 में जयपुर के दोनों नगर निगमों हेरिटेज नगर निगम और ग्रेटर नगर निगम का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इसी कारण से नगर निगम में पार्षद बनने वाले उम्मीदवारों ने वार्डों में वहां के निवासियों से मिलना जुलना शुरू कर दिया है। मौजूदा पार्षद भी अपनी-अपनी राजनीतिक पार्टियों से टिकट फिर से मिलने का जुगाड़ लगाने लगे हैं तो दूसरे उम्मीदवार भी टिकट के लिए कोशिश शुरू कर चुके हैं। नगर निगम के कई पार्षदों ने वार्डों में अच्छे विकास करवाए हैं जिनके जनता भी काफी प्रशंसा करती है। कई पार्षद कमीशन खोरी और वार्ड का विकास नहीं करवाने को लेकर बदनाम हो रहे हैं। कुछ निर्दलीय पार्षद जिन्होंने भाजपा कांग्रेस उम्मीदवारों को हराकर जीत दर्ज की थी फिर से चुनाव में उतरने की कोशिश में है। जयपुर में पिछली कांग्रेस सरकार में वार्डों का आकार काफी कम कर दिया था। इस कारण से जयपुर नगर निगम हेरिटेज में 100 वार्ड और जयपुर नगर निगम ग्रेटर में 150 वार्ड हो गए थे। ज्यादा पार्षद होने के कारण जयपुर का विकास कम हुआ और राजनीति ज्यादा हुई।
नवंबर 2025 या फिर फरवरी 2026 में हो सकते हैं पार्षद चुनाव-
भाजपा सरकार ने इस बार फिर से वार्डो का आकार बड़ा कर दिया है और जयपुर के दोनों नगर निगमों को मिलाकर एक नगर निगम बनाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। माना जा रहा है कि जयपुर में कुल 150 वार्ड बनाए जाएंगे और एक ही नगर निगम होगा। नगर निगम वार्डो का आकार और मतदाता बढ़ने से ज्यादातर वर्तमान नगर निगम पार्षदों को फिर से जीतकर आने में काफी मुश्किल होगी। नगर निगम चुनाव में जनता के बीच सबसे रोचक वातावरण बन जाता है। नगर निगम चुनाव पार्टी मुद्दों से ज्यादा सड़क, सफाई, पानी और बिजली जैसे मुद्दों पर लड़ा जाता है। कई वार्डो में जाति एवं धार्मिक आधार पर चुनाव में हार जीत देखने को मिल जाती है ।

मुस्लिम क्षेत्रों में चुनाव –
जयपुर के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में चुनाव विकास के मुद्दों पर नहीं होता है। यही कारण है कि इन क्षेत्रों में पार्षद सफाई सीवर, सड़क, पानी, बिजली एवं स्कूलों के विकास पर ध्यान नहीं देता है। ज्यादातर आबादी राजनीतिक रूप से अज्ञान है जो पैसे लेकर या अन्य लालच में अपना वोट देते हैं। वार्डों में जातियों का बोलबाला भी होता है। ऐसी स्थिति में अयोग्य लोग भी जाति का सहारा लेकर पार्षद बन जाते है। चारदिवारी में या मुस्लिम क्षेत्रों में भ्रष्टाचार अन्य क्षेत्रों से ज्यादा है। यहां नगर निगम अधिकारी कर्मचारी बिना कमीशन के काम नहीं करना चाहते हैं। जनता में जागरूकता नहीं होने के कारण क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण और सफाई की शिकायत लिखित में नहीं की जाती है। इसी कारण पार्षद और नगर निगम कर्मचारी बिना काम किए ही सरकार से मोटी सैलरी लेते हैं। वर्तमान में मुस्लिम क्षेत्रों, मोहल्लों में बड़े-बड़े चोंक खत्म हो गए, चौड़े रास्ते गलियों में बदल गए और सड़कों के बीच में कचरा डिपो बन गए हैं। यदि जनता निष्पक्ष होकर पार्षद जीताकर लाए तो सफाई, सड़क और पानी, सरकारी स्कूलों की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है।
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