बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए एवं इंडिया गठबंधन में रोचक मुकाबला होगा
इंडिया गठबंधन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम से गठबंधन नहीं करना चाहता है
-जन स्वराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर का कहना है कि भाजपा को हराने के लिए सभी सेक्युलर राजनीतिक दलों को एक साथ आना चाहिए

-इंडिया गठबंधन और एआईएमआईएम का भविष्य मुस्लिम वोटरों के हाथ में
एम खान
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। बिहार में मतदाता सूची पूर्निरीक्षण कार्य (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों में घमासान अब सड़कों पर आ गया है। SIR के विरोध में संसद में विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता एवं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मतदाता अधिकार यात्रा सोमवार से शुरू कर दी है। मतदाता अधिकार यात्रा में बिहार की जनता भारी संख्या में उमड़ रही है। इससे माना जा रहा है कि भाजपा, जनता दल यूनाइटेड, लोजपा, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा का संयुक्त गठबंधन एनडीए और कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल सहित अन्य छोटे दल जो इंडिया गठबंधन में शामिल दलों में रोचक मुकाबला होने जा रहा है। बिहार में चुनाव आयोग पर सत्ताधारी पार्टी के समर्थन के आरोप लग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग को भविष्य में सख्त निर्देश मिलने की संभावना है। बिहार चुनाव एनडीए और इंडिया गठबंधन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बिहार में दलित, पिछड़े वर्ग एवं मुस्लिम वर्ग के वोटरों की बड़ी संख्या है। स्वर्ण वर्ग बिहार में पूरी तरह भाजपा के साथ है। तो कुर्मी वोटर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ हैं। यादव वर्ग के वोटर इस बार तेजस्वी यादव के साथ दिखाई दे रहा है। दलित वोटर लोजपा, हम, राजद, जेडीयू, भाजपा एवं कांग्रेस सब में बटता है। इसी तरह मुस्लिम वोटर राजद, कांग्रेस, एआईएमआईएम एवं जेडीयू में बटता है। इसलिए कहा जा सकता है कि कोई भी जाति वर्ग किसी एक दल के साथ पूरी तरह मजबूती से नहीं है।
-इंडिया गठबंधन एवं एआईएमआईएम
इंडिया गठबंधन में प्रमुख रूप से कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल मुख्य राजनीतिक दल है। राहुल गांधी को देश का सेक्युलर नेता माना जाता है और इसी तरह लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को मुसलमान का हितेषी नेता माना जाता है। कांग्रेस और राजद को बिहार के 20 प्रतिशत मुसलमानो के वोट चाहिए जिससे बिहार की सत्ता उनके हाथ लग जाए। लेकिन इन नेताओं और पार्टियों को मुस्लिम मुद्दों पर बोलने वाले नेता नहीं चाहिए। इसीलिए बिहार एआईएमआईएम अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की इंडिया गठबंधन में शामिल करने की अपील का इंडिया गठबंधन के नेताओं ने कोई जवाब नहीं दिया। अख्तरुल ईमान ने इंडिया गठबंधन के नेताओं को पत्र लिखा है कि सेक्युलर वोटरों के विभाजन को रोकने के लिए एआईएमआईएम को इंडिया गठबंधन में शामिल करना चाहिए। लेकिन पत्र का अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। इंडिया गठबंधन के नेताओं की इच्छा रहती है कि मुस्लिम वोटरों के समर्थन से उनको सत्ता की कुर्सी मिल जाए लेकिन उनको होनहार मुस्लिम लीडर स्वीकार नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम पार्टी ने 5 से 6 सीटे जीती थी और दर्जनों सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी। इस बार एआईएमआईएम ने बिहार विधानसभा चुनाव में 100 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। बिहार का मुस्लिम वर्ग इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी वक़्फ़ संशोधित बिल को लेकर नाराज है। इसलिए बिहार का मुस्लिम इस बार एआईएमआईएम का खुलकर समर्थन करेगा या फिर इंडिया गठबंधन को समर्थन देकर तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाएंगा, यह विधानसभा चुनावों के बाद ही पता चल पाएंगा। एआईएमआई का भविष्य मुस्लिम वोटरों के समर्थन पर ही टिका है।

-बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर
जन स्वराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर भी बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज करवाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। प्रशांत किशोर को चुनावी रणनीति का चाणक्य माना जाता है। उन्होंने अपनी चुनावी रणनीति के आधार पर कई राजनीतिक दलों को सत्ता दिलादी। अब स्वयं बिहार की सत्ता में आने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। प्रशांत किशोर जब से राजनीति में आए हैं, उनकी राजनीतिक विचारधारा लगातार बदलती रहती है। शुरुआत में प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में अकेले चलना चाहते थे। अब सभी सेक्युलर राजनीतिक दलों को मुसलमानों के साथ गठबंधन करने की सलाह दे रहे हैं और उस गठबंधन में स्वयं भी शामिल होना चाहते हैं। लेकिन इंडिया गठबंधन के नेताओं से उनकी पटरी नहीं बैठ पा रही है और साथ में बिहार के मुसलमानों का वे समर्थन लेना चाहते हैं। बिहार में सिर्फ भाजपा एकमात्र पार्टी है जो मुसलमानों का विरोध भी खुलकर करती है और उनका वोट लेने की इच्छा भी नहीं रखती है। लेकिन भाजपा का ऐसे कई दलों से समझौता है जो मुस्लिम वोटरों का समर्थन लेते रहे हैं और लेने की इच्छा रखते हैं।
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