राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर लगाए वोट चोरी के आरोप
यदि आरोप सत्य पाए गए तो देश के लोकतंत्र को नुकसान होने की पूरी संभावना
जयपुर (रॉयल पत्रिका)। कांग्रेस नेता और संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर चुनाव में हेरा-फेरी का काम कर रहा है। राहुल गांधी ने पत्रकारों के सामने चुनाव आयोग की वोट लिस्ट में धांधली के सबूत पेश किए। राहुल गांधी का कहना है कि चुनाव आयोग की हेरा-फेरी के उनके पास 100 प्रतिशत सबूत हैं। राहुल गांधी ने कहा कि कर्नाटक में पार्टी के आंतरिक सर्वे में 16 लोकसभा सीट जीतने की उम्मीद थी लेकिन 9 सीट जीत पाए। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से तुरंत पहले करीब एक करोड़ वोट नए जोड़े गए। कर्नाटक की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर करीब एक लाख फर्जी मतदाता जोड़े गए। एक छोटे से मकान पर 80 वोटरों को जोड़ दिया गया। जिसकी पुष्टि मीडिया ने उस मकान पर जाकर की है। राहुल गांधी ने उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी वोट चोरी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में सदिगध गतिविधियां हुई उदाहरण के लिए उन्होंने उत्तराखंड में एक रोडशो के बाद मतदान में असामान्य परिणाम की बात कही, जहां भारी भीड़ के बावजूद कांग्रेस को अपेक्षित वोट नहीं मिले। गांधी ने बिहार में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाएं, जिसके तहत मतदाता सूचियों को अपडेट किया जा रहा है। उन्होंने इसे मतदाता सूची में हेरा-फेरी का हिस्सा बताया। गांधी ने चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलकर काम करने और संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे देशद्रोह की संज्ञा दी और दावा किया कि उनके पास 100 प्रतिशत सबूत है।

-आरोप सही पाए गए तो क्या होगा?

राहुल गांधी के आरोप गंभीर हैं और यदि सत्य हैं तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा हो सकते हैं। हालांकि अभी तक उनके द्वारा पेश किए गए सबूत सीमित है। इंडिया टुडे और दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म ने उनके दावे (मुनि रेड्डी गार्डन) को सही पाया है, लेकिन यह पूरे आरोप को सत्यापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। चुनाव आयोग और भाजपा नेता राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रहे हैं। जबकि विपक्ष संसद और संसद के बाहर चुनाव आयोग की धांधली के विरोध में
आंदोलन चलाने की योजना पर काम कर रहे हैं। यदि चुनाव आयोग आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं करवाता है तो देश की जनता का लोकतंत्र पर भरोसा उठ जाएगा। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता समाप्त हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट और सरकार से मुख्य चुनाव आयुक्त और अतिरिक्त चुनाव आयोग को हटाने और नए तरीके से निष्पक्ष चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की मांग उठेगी। विपक्षी पार्टिया अपने कार्यकर्ताओं के द्वारा वोटर लिस्ट की निगरानी करने लगेगी। फर्जी मतदाताओं को ढूंढने की कोशिश की जाएगी। कुल मिलाकर बिहार विधानसभा चुनाव और उसके बाद कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष भाजपा और चुनाव आयोग के खिलाफ बड़ा आंदोलन कर सकता है।
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