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देश और प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज

जयपुर

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प्रधानमंत्री और गृहमंत्री मिले राष्ट्रपति से

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल एक सप्ताह में दो बार दिल्ली पहुंचे तो पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे भी दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी एवं अन्य नेताओं से मिली

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जयपुर। उपराष्ट्रपति जगदीश धनकड़ के इस्तीफा के बाद देश की राजनीति में हलचल नजर आने लगी है। वैसे राजस्थान की राजधानी में पहले से ही कुछ बड़ा होने के कयास लगाए जा रहे थे। राजस्थान की राजनीति में जो दिखाई दे रहा है उससे ज्यादा हलचल चल रही है लेकिन दिखाई कम दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का भाजपा के बड़े नेताओं से मिलने ने राजनीति में कुछ नया होने के संकेत दे दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री को कोई बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की बात कर रहा है तो कोई उपराष्ट्रपति और कोई प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने की बात कर रहा है। लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है। क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे का भाजपा में एक बड़ा कद है। उनको राजनीति का बड़ा अनुभव है। इसलिए भाजपा में राजे को कभी भी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

-राजनीतिक नियुक्तियां

प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बार-बार दिल्ली दौरों ने राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। मुख्य विपक्षी दल पहले से ही मुख्यमंत्री को बदलने की हवा फैला रहा है लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल के दिनचर्या और कार्यशैली से नहीं लगता कि उनकी कुर्सी खतरे में है। पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी को वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर खुशी की लहर दौड़ा दी है। प्रदेश में दर्जनों आयोग, बोर्ड, समितियों में नियुक्तियां होनी है। भाजपा के बड़े से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं तक आशा लगाए बैठा है कि सरकार में उसको जरूर मौका मिलेगा। इसलिए भाजपा कार्यकर्ताओं की अब बड़े नेताओं के पास आवाजाही बढ़ने लगी है।

-अल्पसंख्यक बोर्ड, आयोग में नियुक्तियां

प्रदेश में भाजपा के पास अल्पसंख्यक वर्ग में सीमित संख्या में नेता और कार्यकर्ता है। फिर भी लंबे समय से भाजपा की सेवा कर रहे कार्यकर्ताओं को जल्दी ही बोर्ड, निगम, आयोग एवं कमेटी में मौका मिल सकता है। अल्पसंख्यक समुदाय में मुस्लिम वर्ग सबसे बड़ा समुदाय है। मदरसा बोर्ड, वक्फ बोर्ड एवं हज कमेटी में मुस्लिम वर्ग से आने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को नियुक्तियां मिल सकती है। जबकि अल्पसंख्यक आयोग और अल्पसंख्यक वित्त निगम में सिक्ख, जैन, ईसाई, बौद्ध को मौका मिल सकता है। भाजपा की राजनीतिक सोच के अनुसार अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष किसी सिख समुदाय के भाजपायी को मिल सकता है। जैन समुदाय को अल्पसंख्यक आयोग की जिम्मेदारी इसलिए नहीं मिलेगी क्योंकि जैन वर्ग की पैठ मुख्य भाजपा में ऊपर से नीचे तक है और अनेक जिम्मेदारियां उनके पास हैं। कुछ भी हो अल्पसंख्यक वर्ग के भाजपा कार्यकर्ताओं में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बड़ी हलचल और उत्सुकता है।

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-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले

मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे के बाद कोई सरकारी कामकाज नहीं हो पाया है। अभी तक एक भी विधेयक संसद में पास नहीं हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर पर बहस भी संसद में हंगामेदार रही है। लेकिन एक ही दिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का राष्ट्रपति मुर्मू से मिलना देश की राजनीति में कुछ बड़ा होने का संकेत दे रहा है। कुछ दिनों में उपराष्ट्रपति का चुनाव होना है। लेकिन भाजपा अभी तक अपने उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं कर पाई है। दूसरी तरफ विपक्ष बिहार की वोटर लिस्ट में हेरा-फेरी को लेकर संसद में बहस की मांग पर अड़ा हुआ है। विपक्ष मजबूत होने के कारण संसद चलने के समय सत्तापक्ष हमेशा परेशान हो जाता है। सरकार अपने विधायी कार्य भी संसद में पूरे नहीं कर पा रही है। कई विधेयक संसद में पास होने हैं, उन पर बहस नहीं हो पा रही है। इसलिए कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का राष्ट्रपति से मिलना कुछ बड़े होने का संकेत दे रहा है।

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